कटनी के बहोरीबंद, स्लीमनाबाद और रीठी में अवैध पैकारी का खेल, पुलिस और आबकारी की भूमिका पर गंभीर सवाल
कटनी | मध्य प्रदेश के कटनी जिले से एक बेहद चिंताजनक और गंभीर मामला सामने आ रहा है। जिले के तीन प्रमुख क्षेत्रों बहोरीबंद, स्लीमनाबाद और रीठी में कथित रूप से अवैध शराब पैकारी का कारोबार इन दिनों पूरे शबाब पर है। स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों से मिल रही खबरों के मुताबिक, इन क्षेत्रों के गांव-गांव में शराब माफिया और ठेकेदारों के गुर्गे बेखौफ होकर अवैध शराब की खेप खपा रहे हैं।हैरानी की बात यह है कि इस पूरे खेल पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है यानी स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग उनकी कार्यशैली पर अब गंभीर उंगलियां उठने लगी हैं। ग्रामीणों का खुला आरोप है कि शासन के नियमों को ताक पर रखकर, तय दुकानों के अलावा भी हर छोटे-बड़े गांव, किराना दुकानों, टपरियों और ढाबों पर अवैध शराब आसानी से उपलब्ध कराई जा रही है। इस अवैध कारोबार से जहां एक ओर शासन को हर महीने लाखों रुपये के राजस्व की चपत लग रही है, वहीं दूसरी ओर शांत ग्रामीण अंचलों में अपराध, पारिवारिक कलह और नशे की लत तेजी से पैर पसार रही है।
गांव-गांव में फैले ‘पैकारी’ के जाल का काला सच
कटनी जिले के बहोरीबंद, स्लीमनाबाद और रीठी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर अवैध शराब के सिंडिकेट ने अपना एक मजबूत नेटवर्क तैयार कर लिया है।नियमानुसार, शराब की बिक्री केवल स्वीकृत आबकारी दुकानों से ही हो सकती है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।
कैसे काम करता है यह अवैध नेटवर्क
सूत्रों के अनुसार, शराब ठेकेदारों के एजेंट मुख्य दुकानों से बड़ी मात्रा में देसी और विदेशी शराब वाहनों में भरकर ग्रामीण इलाकों के ‘डंपिंग पॉइंट्स’ तक पहुंचाते हैं। इन डंपिंग पॉइंट्स से स्थानीय किराना दुकानों, चाय के टपरियों, पान के ठेलों और चुनिंदा घरों में शराब की बोतलें सप्लाई की जाती हैं। मुख्य आबकारी दुकानें तो तय समय पर बंद हो जाती हैं, लेकिन इन अवैध पैकारियों पर देर रात और सुबह-सुबह भी दोगुनी कीमतों पर शराब आसानी से मिल जाती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बहोरीबंद के दूरदराज के आदिवासी बहुल इलाकों, स्लीमनाबाद के राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे गांवों और रीठी के ग्रामीण अंचलों में यह खेल सबसे ज्यादा सक्रिय है।
शासन को करोड़ों के राजस्व की हानि, युवा पीढ़ी बर्बाद
अवैध पैकारी का यह खेल केवल कानून व्यवस्था का उल्लंघन नहीं है, बल्कि इसके आर्थिक और सामाजिक परिणाम बेहद घातक साबित हो रहे हैं। शराब की हर एक बोतल जो बिना वैध बिल या स्वीकृत दुकान के बाहर बेची जाती है, वह सीधे तौर पर राज्य सरकार के खजाने पर डाका है।आबकारी विभाग को मिलने वाली ड्यूटी और टैक्स की चोरी कर ठेकेदार और माफिया अपनी जेबें गर्म कर रहे हैं। यदि कटनी के इन तीन ब्लॉकों में ही सही तरीके से जांच हो, तो हर महीने लाखों-करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी जा सकती है।
सामाजिक ताना-बाना छिन्न-भिन्न
ग्रामीण क्षेत्रों में इस अवैध कारोबार का सबसे बुरा असर युवाओं और श्रमिक वर्ग पर पड़ रहा है। गांवों में आसानी से शराब उपलब्ध होने के कारण कम उम्र के लड़के भी नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं।
पुलिस और आबकारी विभाग की ‘रहस्यमयी’ खामोशी पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल स्थानीय प्रशासन, विशेषकर पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है।ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि कई गांवों में खुलेआम और सरेराह अवैध पैकारी होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा आंखें मूंद लेना कई तरह के संदेहों को जन्म देता है।
संयुक्त विशेष कार्य बल (STF) का गठन
आबकारी और पुलिस विभाग की एक संयुक्त टीम बनाई जाए, जो जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में बहोरीबंद, स्लीमनाबाद और रीठी के संदिग्ध गांवों में अचानक छापेमारी करे।
लापरवाह अधिकारियों पर गाज गिरे
जिन क्षेत्रों से लगातार शिकायतें आ रही हैं, वहां के स्थानीय थाना प्रभारियों और आबकारी उप-निरीक्षकों की जवाबदेही तय की जाए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही, ढील या माफिया के साथ मिलीभगत (साठगांठ) सामने आती है, तो उन्हें तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की जाए।
पुलिस वाला न्यूज़ कटनी से पारस गुप्ता की रिपोर्ट
