डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
डिंडौरी। जिले की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शैक्षणिक कार्यों की बेहतर मॉनिटरिंग के लिए राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर डिंडौरी जिले में सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी पत्र में अकादमिक समन्वयक (BAC) एवं जनशिक्षक (CAC) के पदों की पूर्ति को लेकर स्पष्ट प्रक्रिया और समय-सीमा निर्धारित की गई है, लेकिन जिले में अब तक इसका अपेक्षित पालन नहीं होने का दावा किया जा रहा है।
24 जून 2026 को जारी पत्र में दिए गए हैं स्पष्ट निर्देश
उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल से जारी पत्र में अकादमिक समन्वयक एवं जनशिक्षक के पदों की पूर्ति के लिए आवश्यक प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में पदों की पात्रता, चयन प्रक्रिया, संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी और निर्धारित समय-सारिणी का उल्लेख किया गया है।
दस्तावेज में संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करते हुए पदों की पूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों की मॉनिटरिंग और शिक्षकों को अकादमिक सहयोग उपलब्ध कराने का काम प्रभावित न हो।
कागज पर आदेश, जमीन पर स्थिति क्या?
अब सवाल यह है कि जब राज्य स्तर से पूरी प्रक्रिया के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं, तो डिंडौरी जिले में इन निर्देशों के अनुरूप अब तक क्या कार्रवाई की गई?
यदि प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है तो इसके पीछे कारण क्या है? क्या जिले में पद रिक्त हैं, या चयन प्रक्रिया लंबित है? और यदि प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है?
शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों के मुताबिक अकादमिक समन्वयक और जनशिक्षक की भूमिका स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता, शिक्षकों को मार्गदर्शन तथा विभागीय योजनाओं की मॉनिटरिंग से जुड़ी होती है। ऐसे में पदों की पूर्ति में देरी का सीधा असर मैदानी स्तर की शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।
जवाबदेही तय करने की जरूरत
राज्य शिक्षा केंद्र के आदेश के बावजूद यदि जिले में निर्धारित प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है तो यह महज प्रशासनिक देरी का मामला नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की मॉनिटरिंग से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।
अब देखना होगा कि जिला शिक्षा विभाग इस मामले में क्या स्थिति स्पष्ट करता है। क्या राज्य के निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया पूरी की जा रही है या फिर आदेश फाइलों में ही दबा हुआ है?
बड़ा सवाल यही है—राज्य का आदेश साफ है, तो डिंडौरी में उसके पालन की स्थिति आखिर साफ क्यों नहीं है?
