शहडोल मध्यप्रदेश

शहडोल। जिले के ग्रामीण इलाकों में अवैध खनन और बेकाबू ब्लास्टिंग का खेल अब संगठित रूप लेता नजर आ रहा है। गोहपारू, नवलपुर, कंचनपुर, असवारी, जैतपुर, रसमोहनी और पकरिया जैसे गांवों में लगातार हो रही विस्फोटक गतिविधियों ने लोगों की नींद उड़ा दी है। हालात इतने भयावह हैं कि रोजाना होने वाले धमाकों से घर कांप रहे हैं और दीवारों में दरारें पड़ रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा खेल बिना संरक्षण के संभव नहीं है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में खदानों में कहीं भी, कभी भी ब्लास्टिंग की जा रही है। हालांकि इन नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रहे आरोपों ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
“जहां चाहो वहां ब्लास्टिंग” – नियम सिर्फ कागजों में
खनन नियमों के मुताबिक ब्लास्टिंग से पहले सुरक्षा घेरा, सायरन और क्षेत्र खाली कराना अनिवार्य होता है। लेकिन हकीकत यह है कि इन गांवों में इन नियमों का कोई पालन नहीं हो रहा। जैतपुर और रसमोहनी में खुलेआम भारी मशीनों और विस्फोटकों का उपयोग किया जा रहा है, जबकि पकरिया और कंचनपुर में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है।
नवलपुर और गोहपारू के ग्रामीणों का कहना है कि बिना किसी चेतावनी के अचानक धमाके कर दिए जाते हैं। इससे कई बार लोग जान बचाकर भागने को मजबूर हो जाते हैं।
ग्रामीणों के घरों में दरारें, डर में जी रही आबादी
लगातार हो रही ब्लास्टिंग के कारण घरों में दरारें पड़ना अब आम बात हो गई है। असवारी और कंचनपुर के कई परिवारों ने बताया कि उनके मकान रहने लायक नहीं बचे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि “हर धमाका ऐसा लगता है जैसे भूकंप आ गया हो।”
बच्चों और बुजुर्गों में डर का माहौल है। कई परिवारों ने रात में घर छोड़कर बाहर सोने की मजबूरी भी जताई है।
खनिज विभाग पर ‘मौन सहमति’ के आरोप
सबसे बड़ा सवाल खनिज विभाग की भूमिका पर उठ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग को सब कुछ पता होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। सूत्रों की मानें तो कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन न तो निरीक्षण हुआ और न ही किसी खदान पर सख्ती दिखाई गई।
यह भी चर्चा है कि कुछ लोगों को “छूट” मिलने के कारण वे बेखौफ होकर खनन और ब्लास्टिंग कर रहे हैं। हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर गहरा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की अनियंत्रित ब्लास्टिंग से जमीन की स्थिरता कमजोर हो रही है, जिससे भविष्य में बड़े भू-स्खलन या हादसों की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा धूल और प्रदूषण के कारण सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं।
बड़ी दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा
लगातार हो रही ब्लास्टिंग के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। यदि विस्फोट के समय कोई व्यक्ति पास में मौजूद रहा, तो जान जाना तय है। इसके अलावा सड़क, पुल और अन्य ढांचों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है।
ग्रामीणों की चेतावनी – अब आर–पार की लड़ाई
प्रभावित गांवों के लोगों ने साफ कहा है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध खदानों को तुरंत बंद किया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
निष्कर्ष: सिस्टम पर सवाल, जवाब किसके पास?
गोहपारू, नवलपुर, कंचनपुर, असवारी, जैतपुर, रसमोहनी और पकरिया में जो कुछ हो रहा है, वह सिर्फ अवैध खनन नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी की कहानी भी बयां कर रहा है। सवाल यह है कि आखिर कब तक यह धमाकों का खेल चलता रहेगा और जिम्मेदार विभाग कब जागेगा?
अजय पाल







