चार वित्तीय वर्षों के खर्च की जांच की मांग; बिल-वाउचर, जीएसटी विवरण और भुगतान की प्रमाणिकता पर उठे सवाल

RTI से मिले दस्तावेजों के आधार पर तत्कालीन पंचायत सचिव के कार्यकाल की जांच की मांग, विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन कराने की उठी आवाज

गरियाबंद/छुरा। ग्राम पंचायत अतरमरा में 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2023-24 तक पंचायत में कराए गए कार्यों और प्रस्तुत बिल-वाउचर की प्रमाणिकता की जांच की मांग को लेकर मामला अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) तक पहुंच गया है। भाजपा आरटीआई प्रकोष्ठ के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं दुर्ग संभागीय प्रभारी खिलेश्वर गोस्वामी ने छत्तीसगढ़ शासन के आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

बिलों में कमियां, हस्तलिपि पर सवाल—आखिर कैसे हुआ सरकारी राशि का हिसाब-किताब?

शिकायतकर्ता के अनुसार, सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों के परीक्षण में कुछ बिलों पर बिल क्रमांक और जारी करने की तारीख का उल्लेख नहीं होने, कुछ बिलों में जीएसटी नंबर उपलब्ध नहीं होने तथा अलग-अलग दुकानदारों एवं फर्मों के नाम से प्रस्तुत बिलों की हस्तलिपि एक जैसी होने की आशंका सामने आई है।

इन बिंदुओं ने पंचायत के वित्तीय लेन-देन की पारदर्शिता और अभिलेखों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इन कमियों के आधार पर किसी बिल को फर्जी घोषित नहीं किया जा सकता, लेकिन इनकी अनदेखी कर सरकारी राशि के खर्च को पूरी तरह सही मान लेना भी उचित नहीं होगा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन बिलों के आधार पर 15वें वित्त आयोग की राशि का भुगतान दर्शाया गया, क्या वास्तव में सामग्री खरीदी गई थी? क्या सामग्री पंचायत तक पहुंची और उसका उपयोग संबंधित विकास कार्यों में हुआ? क्या भुगतान उन्हीं दुकानदारों या आपूर्तिकर्ताओं को किया गया, जिनके नाम से बिल प्रस्तुत किए गए?

इन सवालों का जवाब केवल कागजी खानापूर्ति से नहीं, बल्कि मूल अभिलेखों की जांच, भुगतान के सत्यापन और मौके पर विकास कार्यों के भौतिक परीक्षण से ही सामने आ सकता है।

चार साल के खर्च का हिसाब सार्वजनिक हो, तत्कालीन सचिव के कार्यकाल की हो जांच

शिकायत में तत्कालीन पंचायत सचिव चेतन सोनकर के कार्यकाल के दौरान वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2023-24 तक 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए कार्यों और उनसे संबंधित वित्तीय अभिलेखों की जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

पंचायत को विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि का उद्देश्य गांव में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि संबंधित अवधि में स्वीकृत राशि कितनी थी, किस कार्य पर कितनी राशि खर्च की गई, सामग्री की खरीदी पर कितना भुगतान हुआ और धरातल पर उन खर्चों के अनुरूप काम दिखाई दे रहा है या नहीं।

यदि अभिलेखों में खर्च दर्शाया गया है, तो उसका प्रमाण भी होना चाहिए। यदि सामग्री खरीदी गई है, तो उसकी आपूर्ति और उपयोग का रिकॉर्ड मिलना चाहिए। और यदि विकास कार्यों के नाम पर भुगतान हुआ है, तो मौके पर उसकी वास्तविकता भी सामने आनी चाहिए।

मूल बिल-वाउचर से लेकर बैंक खाते तक हो जांच

खिलेश्वर गोस्वामी ने EOW से पंचायत के मूल बिल-वाउचर, कैशबुक, लेजर, बैंक स्टेटमेंट, चेक एवं ई-पेमेंट विवरण, पंचायत प्रस्ताव, कार्यादेश, प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृतियों तथा माप पुस्तिका की जांच कराने की मांग की है।

इसके साथ ही संबंधित विकास कार्यों का स्थल पर भौतिक सत्यापन करने, बिलों में दर्शाई गई सामग्री की मात्रा का वास्तविक उपलब्धता एवं उपयोग से मिलान करने तथा संबंधित दुकानदारों, आपूर्तिकर्ताओं, भुगतान प्राप्तकर्ताओं और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के बयान दर्ज करने का अनुरोध किया गया है।

शिकायत में संदिग्ध बिलों की आवश्यकता के अनुसार हस्तलेखन विशेषज्ञ से जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक मूल दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है, ताकि अभिलेखों की प्रमाणिकता सुनिश्चित की जा सके।

दोष प्रमाणित होने पर FIR और राशि की वसूली की मांग

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच में यदि फर्जी बिल-वाउचर, कूटरचित दस्तावेजों, शासकीय राशि के दुरुपयोग या अन्य आर्थिक अनियमितताओं के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, यदि शासकीय राशि का अनुचित भुगतान प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार वसूली की कार्रवाई भी की जाए।

गोस्वामी का कहना है कि पंचायतों को मिलने वाली सरकारी राशि जनता की बुनियादी सुविधाओं और ग्रामीण विकास के लिए होती है। इस राशि के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसलिए अतरमरा पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि से संबंधित शिकायत की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।

अब जांच से ही सामने आएगी खर्च की वास्तविकता

अतरमरा पंचायत से जुड़े इस मामले में अब मुख्य सवाल यही है कि प्रस्तुत बिल-वाउचर और भुगतान संबंधी अभिलेख वास्तविक खरीद एवं विकास कार्यों से मेल खाते हैं या नहीं। यदि दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी नहीं है, तो जांच से स्थिति स्पष्ट होगी; वहीं, यदि वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुलेगा।

सरकारी धन के खर्च का हिसाब केवल कागजों में नहीं, धरातल पर भी दिखाई देना चाहिए। अब देखना होगा कि EOW इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और चार वित्तीय वर्षों के खर्च की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

रिपोर्ट नेहरू साहू जिला ब्यूरो गरियाबंद

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