डीआईजी रतलाम रेंज ने तीन प्रकरणो में ₹500-500 के नकद पुरस्कार से किया सम्मानित; पुलिस की प्रभावी कार्रवाई से न्याय व्यवस्था के प्रति जनविश्वास मजबूत
नीमच उत्कृष्ट कार्यकुशलता, उच्च व्यावसायिक दक्षता और प्रभावी विवेचना के लिए जिला मंदसौर में पदस्थ निरीक्षक आर.सी. डांगी को पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी), रतलाम रेंज द्वारा नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। दिनांक 12 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, रेंज के जिलों में अगस्त 2026 के दौरान समीक्षा किए गए निर्णित गंभीर अपराधों में प्रभावी विवेचना एवं दोषसिद्धि में योगदान के लिए उन्हें विभिन्न प्रकरणों में पृथक-पृथक ₹500 के नकद पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया है।
इस सम्मान में जिला नीमच के थाना सिंगोली में निरीक्षक डांगी के कार्यकाल के दौरान विवेचित चर्चित कन्हैयालाल भील हत्याकांड भी शामिल है। यह प्रकरण अपनी जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकृति के कारण प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रहा था।
कन्हैयालाल भील हत्याकांड में न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला
थाना सिंगोली के अपराध क्रमांक 133/21 से संबंधित इस मामले में 26 अगस्त 2021 को काना उर्फ कन्हैयालाल भील के साथ हुई क्रूरता ने पूरे समाज को झकझोर दिया था। घटना में कन्हैयालाल को पिकअप वाहन से बांधकर घसीटे जाने के कारण उसकी मृत्यु हो गई थी। घटना का वीडियो सामने आने के बाद देशभर में आक्रोश व्यक्त किया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक श्री सूरज कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक आर.सी. डांगी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने विवेचना के दौरान साक्ष्यों का संकलन किया। प्रकरण में उपलब्ध मौखिक, दस्तावेजी, चिकित्सकीय एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए जाने के परिणामस्वरूप माननीय विशेष न्यायालय (एससी/एसटी एक्ट) द्वारा मुख्य आरोपी छीतर गुर्जर को दोषसिद्ध ठहराते हुए आजीवन कारावास एवं ₹1,000 के अर्थदंड से दंडित किया गया।
यह फैसला पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया। साथ ही, यह भी रेखांकित करता है कि गंभीर अपराधों में निष्पक्ष एवं सुदृढ़ विवेचना, साक्ष्यों की विश्वसनीयता और प्रभावी अभियोजन न्यायिक परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एनडीपीएस के मामलों में भी सराहनीय योगदान
निरीक्षक आर.सी. डांगी को थाना सिंगोली में पदस्थापना के दौरान एनडीपीएस एक्ट के अन्य प्रकरणों में प्रभावी साक्ष्य संकलन एवं विवेचना के लिए भी पुरस्कृत किया गया है। इनमें अपराध क्रमांक 137/21 में दोषसिद्धि के परिणामस्वरूप आरोपी को 2 वर्ष 6 माह का सश्रम कारावास एवं ₹50,000 अर्थदंड तथा अपराध क्रमांक 70/21 में संबंधित पुलिस अधिकारी के साथ किए गए कार्य के परिणामस्वरूप आरोपियों को 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं प्रत्येक पर ₹1 लाख के अर्थदंड की सजा शामिल है।
अपराधियों के लिए स्पष्ट संदेश, आमजन में बढ़ेगा विश्वास
निरीक्षक आर.सी. डांगी को मिला यह सम्मान पुलिस विभाग की उस कार्यशैली को रेखांकित करता है, जिसमें गंभीर अपराधों की विवेचना को केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रखकर न्यायालय में दोषसिद्धि तक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जाता है। वैज्ञानिक साक्ष्य, निष्पक्ष विवेचना, टीमवर्क और अभियोजन के साथ समन्वय अपराधियों को कानून के दायरे में लाने के महत्वपूर्ण आधार हैं।
ऐसी सफलताएं अपराध करने वालों के लिए स्पष्ट संदेश हैं कि गंभीर अपराधों में कानून से बच निकलना आसान नहीं है। वहीं आम नागरिकों, विशेषकर पीड़ित एवं वंचित वर्गों में यह भरोसा मजबूत होता है कि पुलिस की निष्पक्ष कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें न्याय मिल सकता है।
यह उपलब्धि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक श्री सूरज कुमार वर्मा के मार्गदर्शन, पुलिस टीम के समन्वित प्रयासों तथा विवेचना एवं अभियोजन से जुड़े सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के योगदान को भी रेखांकित करती है। निरीक्षक आर.सी. डांगी को मिला यह सम्मान पुलिस विभाग के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है और कर्तव्यनिष्ठा, पेशेवर दक्षता तथा जनसेवा के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।
जिला ब्यूरो ललित सिंह चुंडावत नीमच








