भीड़ जुटाने के लिए दुकानदारों, टैक्सी चालकों और छात्रावास के विद्यार्थियों को बुलाने की चर्चा
शहपुरा। आम नागरिकों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने और उनकी समस्याओं के निराकरण के उद्देश्य से आयोजित जन विश्वास सेवा सेतु अभियान का नगरीय शिविर अपेक्षित सहभागिता के अभाव में फीका नजर आया। शहपुरा के नवीन हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित इस शिविर में नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 1 से 15 तक के नागरिकों को लाभान्वित करने का लक्ष्य था, लेकिन प्रचार-प्रसार की कमी और नगर पंचायत की कथित लापरवाही के चलते नगरवासियों ने शिविर से दूरी बनाए रखी। शिविर में आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की अपेक्षित उपस्थिति नहीं होने से आयोजन की तैयारियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, शिविर में लोगों की कम उपस्थिति के बीच भीड़ जुटाने के लिए नगर पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा आसपास के दुकानदारों, टैक्सी चालकों और छात्रावास के विद्यार्थियों को बुलाकर शिविर में बैठाए जाने की चर्चा रही। यदि यह स्थिति सही है, तो यह शिविर के प्रचार-प्रसार और आम नागरिकों तक इसकी जानकारी पहुंचाने के प्रयासों की हकीकत को उजागर करती है। जिस शिविर का उद्देश्य नगर के प्रत्येक वार्ड के नागरिकों को शासकीय योजनाओं से जोड़ना और उनकी समस्याओं का निराकरण करना था, वहां नगरवासियों की ही गैरमौजूदगी व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही है।

नगर में समस्याओं का अंबार, फिर भी शिविर से क्यों दूर रहे लोग?
शहपुरा नगर के वार्ड क्रमांक 1 से लेकर 15 तक मूलभूत समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। इन समस्याओं को लेकर नगरवासी समय-समय पर एसडीएम की जनसुनवाई से लेकर नगर परिषद कार्यालय तक शिकायतें दर्ज कराते रहे हैं, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी कई शिकायतों का निराकरण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में जन विश्वास सेवा सेतु शिविर में नगरवासियों की कम उपस्थिति को प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति लोगों की नाराजगी से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जब आम नागरिक अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए बार-बार शिकायतें करने के बावजूद राहत पाने में असफल रहते हैं, तो वे ऐसे शिविरों से क्या उम्मीद करें? लोगों को महज शिविरों के आयोजन, औपचारिकताओं और उपस्थिति दर्ज कराने के बजाय उनकी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई और समयबद्ध निराकरण की अपेक्षा है। संभवतः यही वजह है कि नगरवासी शिविर से दूरी बनाए हुए हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और जनसमस्याओं के समाधान के दावों के बीच जमीनी स्तर पर कार्रवाई का अभाव व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
सोशल मीडिया पर अपील, लेकिन शिविर से विधायक की दूरी
गौरतलब है कि क्षेत्रीय विधायक ओमप्रकाश धुर्वे सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार लोगों से सेवा सेतु अभियान के शिविरों में पहुंचकर शासकीय योजनाओं का लाभ लेने की अपील कर रहे थे। हालांकि, शहपुरा में आयोजित नगरीय शिविर में उनकी अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही। जनता से शिविरों में पहुंचने की अपील करने वाले जनप्रतिनिधियों की स्वयं की गैरमौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में यह चर्चा भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि क्या जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी के बिना ऐसे अभियान अपने उद्देश्यों को पूरा कर पाएंगे?

आयोजन तक सीमित न रह जाएं शिविर, कार्रवाई की दरकार
जन विश्वास सेवा सेतु अभियान का मूल उद्देश्य शासन की योजनाओं को पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना और आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करना है। लेकिन शहपुरा के नगरीय शिविर में नागरिकों की कम उपस्थिति ने अभियान के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि नगरवासियों की शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं होता और उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तो केवल शिविर आयोजित करने से प्रशासन के प्रति उनका विश्वास बहाल करना मुश्किल होगा।

अब सवाल यह है कि नगर पंचायत और संबंधित विभाग नगर के 15 वार्डों की समस्याओं के निराकरण के लिए क्या ठोस कदम उठाएंगे? क्या शिविर में नहीं पहुंच पाने वाले नागरिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और उनकी लंबित शिकायतों के समाधान के लिए कोई विशेष पहल होगी, या फिर यह आयोजन भी अन्य शिविरों की तरह औपचारिकता बनकर रह जाएगा? नगरवासियों को अब आश्वासनों और आयोजनों से अधिक धरातल पर ठोस कार्रवाई का इंतजार है।
डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया







