डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया

आठ संग्रहण केंद्रों पर अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुआ विनष्टीकरण; कीट पकड़ने वाले ग्रामीणों को मिले 38.50 लाख रुपये, 1.46 लाख से अधिक प्रभावित पेड़ चिह्नित
डिंडौरी। जिले के बेशकीमती साल (सरई) के जंगलों को अंदर से खोखला कर रहे साल बोरर कीट के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की गई। ग्रामीणों द्वारा एकत्र किए गए कुल 19 लाख 25 हजार 118 साल बोरर कीटों को जिले के आठ संग्रहण केंद्रों पर अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में विधिवत जलाकर नष्ट किया गया। कीटों को एकत्र करने में स्थानीय ग्रामीणों की अहम भूमिका रही, जिन्हें प्रति कीट दो रुपये की निर्धारित दर से कुल 38 लाख 50 हजार 236 रुपये का भुगतान किया गया है।
जिले के करंजिया, समनापुर सहित तीन वन परिक्षेत्रों में साल बोरर का प्रकोप सामने आने के बाद वन विभाग ने बड़े स्तर पर नियंत्रण अभियान शुरू किया था। विभाग के अनुसार बजाग, पश्चिम करंजिया और समनापुर का कुछ हिस्सा सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है।
तने में छेद कर पेड़ों को अंदर से खोखला करता है कीट
साल बोरर कीट साल के पेड़ों के तने में प्रवेश कर उन्हें अंदर से नुकसान पहुंचाता है। लगातार प्रकोप के कारण पेड़ धीरे-धीरे कमजोर होकर सूखने लगता है। वन विभाग द्वारा किए गए सर्वे और चिह्नांकन में जिले में 1 लाख 46 हजार 784 पेड़ों को कटाई एवं सुरक्षा संबंधी कार्रवाई के लिए चिह्नित किया गया है।
प्रभावित पेड़ों की बड़ी संख्या को देखते हुए वन विभाग ने कीटों को पकड़ने के अभियान में स्थानीय ग्रामीणों को भी जोड़ा। ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में साल बोरर पकड़कर निर्धारित संग्रहण केंद्रों में जमा किए।
आठ केंद्रों पर 19,25,118 कीटों का विनष्टीकरण
गुरुवार को करंजिया, जगतपुर, कबीर, चौरादादर, खारिडीह, ठाडपथरा, गोपालपुर और कन्हारी संग्रहण केंद्रों में जमा किए गए कुल 19,25,118 साल बोरर कीटों को विधिवत दहन कर नष्ट किया गया।
यह कार्रवाई तीन डीएफओ—मंडला उत्पादन, डिंडौरी उत्पादन और डिंडौरी सामान्य—के साथ दो प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों तथा तीन एसडीओ के मार्गदर्शन एवं निगरानी में संपन्न हुई।
कीट पकड़ने वाले ग्रामीणों के खातों में 38.50 लाख का भुगतान
सामान्य वन मंडल के एसडीओ सुरेंद्र जाटव के अनुसार ग्रामीणों द्वारा एकत्र किए गए 19,25,118 साल बोरर कीटों के एवज में प्रति कीट दो रुपये की दर से 38,50,236 रुपये की राशि ग्रामीणों के खातों में भुगतान की गई है।
उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा 1,46,784 पेड़ों की कटाई एवं सुरक्षा के लिए मार्किंग का कार्य पूरा कर लिया गया है। सामान्य वन मंडल की ओर से मार्किंग और कीट विनष्टीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब आगे प्रभावित पेड़ों की कटाई उत्पादन विभाग द्वारा की जाएगी। वन विभाग का दावा है कि नियंत्रण अभियान के बाद साल वृक्षों पर साल बोरर कीट का प्रभाव अब कम हुआ है।
केंद्र से मिली अनुमति, प्रभावित पेड़ों की कटाई शुरू
डीएफओ उत्पादन भारती ठाकरे (आईएफएस) ने बताया कि सामान्य वन मंडल द्वारा मार्किंग पूरी किए जाने के बाद भारत सरकार से पेड़ों की कटाई की आधिकारिक अनुमति प्राप्त हो चुकी है। इसके बाद उत्पादन विभाग ने चिह्नित पेड़ों की कटाई शुरू कर दी है।
कटाई एवं अन्य वानिकी कार्यों में स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार दिया जा रहा है और उन्हें मैन-डेज के आधार पर पारिश्रमिक का भुगतान किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में चिह्नित पेड़ों की संख्या अधिक है, वहां लकड़ी के भंडारण के लिए कूप बनाए गए हैं।
फिलहाल बारिश और खराब मौसम के कारण कटाई का कार्य कुछ प्रभावित हो रहा है। मौसम साफ होने के बाद कार्य में तेजी लाई जाएगी। कटाई से प्राप्त लकड़ी का विक्रय पारदर्शी प्रक्रिया के तहत ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाएगा।
वन विभाग के सामने अब चुनौती चिह्नित प्रभावित पेड़ों की कटाई के साथ शेष साल वनों की लगातार निगरानी की है, ताकि साल बोरर के दोबारा बढ़ते प्रकोप को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।








