राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कलेक्टर को सौंपा आवेदन, योजनाओं के क्रियान्वयन और अफसरों की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल*
गरियाबंद। जिले में कमार एवं भुंजिया जनजाति के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए संचालित विकास प्राधिकरणों की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राष्ट्रीय विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समाज भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनसिंग सोरी ने कलेक्टर गरियाबंद को आवेदन सौंपकर कमार विकास प्राधिकरण की विकास राशि के कथित बंदरबांट, पूर्व में किए गए व्यय और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि शासन द्वारा कमार एवं भुंजिया समाज के उत्थान के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली राशि का अपेक्षित उपयोग धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। कई क्षेत्रों में आज भी समुदाय के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। ऐसे में विकास के नाम पर स्वीकृत राशि के उपयोग और उससे हुए कार्यों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना जरूरी है।
विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की मांग
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनसिंग सोरी ने अपने आवेदन में कहा है कि प्रदेश के दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों में निवासरत कमार एवं भुंजिया समुदाय आज भी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ेपन का दंश झेल रहा है। अनेक परिवार शिक्षा, आवास, रोजगार, सड़क, पेयजल सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कमार समाज के विकास के लिए स्वीकृत राशि का कथित रूप से गैर-जरूरी योजनाओं में उपयोग अथवा बंदरबांट किए जाने के कारण वास्तविक जरूरतमंद हितग्राहियों तक योजनाओं का समुचित लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने पूर्व वर्षों में स्वीकृत एवं खर्च की गई राशि, कार्यों की गुणवत्ता, हितग्राहियों को मिले लाभ तथा योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।
1982 में हुआ था कमार विकास प्राधिकरण का गठन
गौरतलब है कि कमार जनजाति के समुचित विकास और कल्याण के उद्देश्य से शासन द्वारा वर्ष 1982 में गरियाबंद में कमार विकास प्राधिकरण का गठन किया गया था। प्राधिकरण का मूल उद्देश्य कमार समुदाय की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक स्थिति में सुधार के लिए योजनाएं तैयार कर उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना था।
लेकिन गठन के चार दशक से अधिक समय बाद भी यदि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का अपेक्षित लाभ नहीं पहुंच पाया है, तो निश्चित रूप से योजनाओं और उनके क्रियान्वयन की समीक्षा आवश्यक हो जाती है। कमार समाज के वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि योजनाओं के नाम पर होने वाले खर्च और वास्तविक धरातल पर दिखाई देने वाले विकास के बीच अंतर की निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए।
जांच हुई तो सामने आ सकती है हकीकत
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कलेक्टर से मांग की है कि कमार विकास प्राधिकरण के गठन से अब तक स्वीकृत राशि, प्राप्त बजट, मदवार व्यय, कार्यों की स्वीकृति, भुगतान, हितग्राहियों को मिले लाभ तथा पूर्ण कराए गए कार्यों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब देखने वाली बात होगी कि कलेक्टर कार्यालय इस गंभीर शिकायत पर क्या कदम उठाता है और जांच के बाद विकास राशि के उपयोग की वास्तविक तस्वीर कितनी साफ होकर सामने आती है।
रिपोर्ट नेहरू साहू जिला ब्यूरो गरियाबंद







