जिला मुख्यालय गरियाबंद से जोड़ने वाला अहम मार्ग बदहाल, चारपहिया आवागमन बंद; ग्रामीणों को 10 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर
गरियाबंद। विगत दिनों हुई भारी बारिश और बाढ़ ने कोचवाय से खरहरी मुख्य मार्ग पर स्थित रपटे की सूरत पूरी तरह बिगाड़ दी है। रपटे का बड़ा हिस्सा टूटकर क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसके चलते इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन बेहद जोखिम भरा हो गया है। तस्वीरें खुद बयां कर रही हैं कि यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
यह मार्ग केवल कोचवाय और खरहरी को जोड़ने वाला रास्ता नहीं, बल्कि जिला मुख्यालय गरियाबंद तक पहुंचने वाला एक अहम संपर्क मार्ग है। इस मार्ग से आसपास के लगभग 10 गांवों के ग्रामीणों का प्रतिदिन आवागमन होता है। रपटा क्षतिग्रस्त होने के बाद इन गांवों के लोगों के लिए मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।
रपटा टूटा तो बढ़ गई करीब 10 किलोमीटर की दूरी
रपटे से आवागमन बाधित होने के कारण ग्रामीणों को अब अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लगभग 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों का समय और आर्थिक खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। वहीं आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने से लेकर विद्यार्थियों, किसानों और रोजमर्रा के कामकाज के लिए आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे चिंताजनक स्थिति स्कूली बच्चों और मोटरसाइकिल सवारों की है। चारपहिया वाहनों का आवागमन लगभग पूरी तरह बंद है, जबकि मोटरसाइकिल चालक मजबूरी में टूटे हुए हिस्से से जान जोखिम में डालकर गुजर रहे हैं। रपटे के नीचे बनी गहरी खाई और आसपास पानी का बहाव किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
जिम्मेदारों की चुप्पी पर ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश और बाढ़ से रपटा क्षतिग्रस्त होने के बाद भी अब तक जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा समस्या के स्थायी समाधान को लेकर गंभीर पहल नजर नहीं आ रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब यह मार्ग करीब 10 गांवों के साथ जिला मुख्यालय को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है, तो फिर इसकी सुध लेने में इतनी देरी क्यों?
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके का तत्काल निरीक्षण कर रपटे की युद्धस्तर पर मरम्मत कराई जाए तथा स्थायी समाधान के लिए मजबूत पुलिया/रपटे का निर्माण किया जाए। साथ ही जब तक मरम्मत कार्य पूरा नहीं होता, तब तक दुर्घटना रोकने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
ग्रामीणों की पीड़ा साफ है—रास्ता टूटा है, लेकिन उनके लिए सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि जिला मुख्यालय तक पहुंचने का महत्वपूर्ण संपर्क टूट गया है। अब सवाल यह है कि प्रशासन किसी अनहोनी का इंतजार करेगा या उससे पहले जागकर कार्रवाई करेगा?
रिपोर्ट नेहरू साहू जिला ब्यूरो गरियाबंद







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