बार-बार गुहार के बाद भी नहीं जागा शिक्षा विभाग, पंचायत और पालकों की चिंता अनसुनी; मांग पूरी नहीं हुई तो तालाबंदी की चेतावनी
गरियाबंद। ग्राम पंचायत मैनपुर-2 के आश्रित ग्राम कांटीदादर के प्राथमिक विद्यालय की बदहाल स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय भवन जर्जर हो चुका है और 58 बच्चों की दर्ज संख्या के बावजूद कक्षा पहली से पांचवीं तक की पढ़ाई अतिरिक्त भवन के महज एक कमरे में संचालित हो रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जिस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों के भविष्य को अंधकार से उजाले की ओर ले जाना है, वही व्यवस्था उन्हें असुविधा और असुरक्षा के साये में शिक्षा लेने को मजबूर क्यों कर रही है?
ग्रामीणों और पालकों का कहना है कि विद्यालय भवन की स्थिति को लेकर कई बार शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन आश्वासन और शिकायतों के बीच समस्या जस की तस बनी हुई है।
पंचायत ने भी लगाई गुहार, फिर भी विभाग बेखबर
ग्राम पंचायत की उपसरपंच सुनीता देवांगन ने बताया कि पंचायत की ओर से भी विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि लगातार जानकारी दिए जाने के बाद भी शिक्षा विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
उपसरपंच की बात व्यवस्था की उस तस्वीर को सामने लाती है, जहां समस्या स्थानीय स्तर से निकलकर अधिकारियों की चौखट तक पहुंचती तो है, लेकिन समाधान की चौखट तक पहुंचते-पहुंचते शायद सरकारी फाइलों की धूल में दब जाती है।
दो बच्चों के भविष्य को लेकर पालक पुकेश साहू चिंतित
वहीं पालक पुकेश कुमार साहू ने अपने अध्ययनरत दो बच्चों के भविष्य को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि जिस स्कूल में बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए, वहां जर्जर भवन और एक कमरे में कई कक्षाओं के संचालन की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अगर समय रहते विद्यालय की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो बच्चों का भविष्य अंधकारमय होने की आशंका है। पालकों की चिंता केवल भवन की मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि वे चाहते हैं कि उनके बच्चों को ऐसा शैक्षणिक वातावरण मिले, जहां वे बिना भय और परेशानी के पढ़ाई कर सकें।
एक कमरे में पांच कक्षाएं—शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल
कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों को एक ही कमरे में पढ़ाना अपने आप में शिक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौती है। अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों की अलग-अलग शैक्षणिक जरूरतें हैं, ऐसे में एक कमरे में पूरी व्यवस्था संचालित होने से पढ़ाई की गुणवत्ता और बच्चों के सीखने की क्षमता दोनों प्रभावित होने की आशंका है।
विडंबना देखिए—बच्चों को भविष्य बनाने के लिए स्कूल भेजा जा रहा है, लेकिन स्कूल की बदहाली ही उनके भविष्य की राह में रोड़ा बन गई है।
पालकों का अल्टीमेटम—मांग पूरी नहीं हुई तो तालाबंदी
लगातार अनदेखी से नाराज पालकों ने अब दो टूक चेतावनी दी है कि यदि विद्यालय भवन की समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे स्कूल भवन में तालाबंदी करने को मजबूर होंगे।
अब सवाल शिक्षा विभाग से है—क्या 58 बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के लिए भी किसी बड़ी घटना का इंतजार किया जा रहा है? पंचायत और पालकों द्वारा बार-बार सूचना दिए जाने के बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती, तो फिर सरकारी योजनाओं और शिक्षा के बड़े-बड़े दावों का लाभ आखिर इन ग्रामीण बच्चों तक कब पहुंचेगा?
कांटीदादर के नौनिहाल पूछ रहे हैं—हमारे भविष्य की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
अब जरूरत आश्वासन की नहीं, बल्कि जर्जर भवन के स्थान पर सुरक्षित भवन और बच्चों के लिए समुचित अध्ययन व्यवस्था की है।
रिपोर्ट नेहरू साहू जिला ब्यूरो पुलिस वाला न्यूज गरियाबंद







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