वनांचल की बेटियों के सपनों को मिली नई उड़ान, ग्रामीण बालिकाओं-महिलाओं को 10वीं ओपन परीक्षा का अवसर
एग्रोक्रेट्स सोसायटी फॉर रूरल डेवलपमेंट की पहल से 29 गांवों की बेटियां फिर थाम रहीं शिक्षा की डोर, एजुकेट गर्ल्स के सहयोग से अधूरी पढ़ाई पूरी करने का मिल रहा अवसर
गरियाबंद। ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों में सामाजिक, आर्थिक एवं पारिवारिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ चुकी बेटियों और महिलाओं के लिए एग्रोक्रेट्स सोसायटी फॉर रूरल डेवलपमेंट ने शिक्षा की नई उम्मीद जगाई है। एजुकेट गर्ल्स के सहयोग से संचालित इस महत्वपूर्ण पहल के माध्यम से गरियाबंद एवं छुरा विकासखंड के 29 गांवों की किशोरियों एवं महिलाओं को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य केवल परीक्षा दिलाना नहीं, बल्कि उन बेटियों के अधूरे शैक्षणिक सपनों को फिर से पंख देना है, जिन्हें कभी परिस्थितियों ने स्कूल की चौखट से दूर कर दिया था। संस्था द्वारा 14 से 29 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं एवं महिलाओं को खुली विद्यालय प्रणाली के माध्यम से कक्षा 10वीं की परीक्षा की तैयारी एवं परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जा रहा है।
इसके लिए गांवों के सामुदायिक भवनों में नियमित अध्ययन कक्षाएं, शैक्षणिक मार्गदर्शन, व्यक्तिगत परामर्श एवं परीक्षा संबंधी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।
गांव की चौखट से बोर्ड परीक्षा तक पहुंच रहीं बेटियां
वनांचल क्षेत्र की अनेक बेटियां आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियों, सामाजिक परिस्थितियों एवं जागरूकता के अभाव के कारण अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पातीं। ऐसी बेटियों के लिए यह पहल उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आई है।
आज जो बेटियां कभी किताबों से दूर हो गई थीं, वे फिर से कॉपी-किताब लेकर पढ़ाई कर रही हैं और 10वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी में जुटी हैं। यह बदलाव केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ उनके भीतर आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भर बनने की भावना भी मजबूत हो रही है।
शिक्षा के साथ आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
संस्था का मानना है कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। विशेषकर ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्र की बेटियों के लिए शिक्षा उनके भविष्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों, जिम्मेदारियों और अवसरों के प्रति जागरूक बनाने का माध्यम भी है।
10वीं की परीक्षा पूरी करने का अवसर मिलने से इन बालिकाओं एवं महिलाओं के सामने आगे की पढ़ाई जारी रखने, विभिन्न प्रशिक्षण प्राप्त करने और रोजगार के नए अवसर तलाशने के रास्ते भी खुलेंगे।
पहल को सफल बनाने में टीम की महत्वपूर्ण भूमिका
इस पूरी पहल में एग्रोक्रेट्स सोसायटी फॉर रूरल डेवलपमेंट की टीम द्वारा निरंतर मार्गदर्शन एवं शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। कार्यक्रम में एजुकेट गर्ल्स परियोजना के सहयोगी प्रदीप कुमार सिंह, कार्यक्रम प्रबंधक नेहा वर्मा एवं कार्यक्रम समन्वयक कविता साहू की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इनके मार्गदर्शन, समन्वय और निरंतर प्रयासों से ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्र की बेटियों और महिलाओं को दोबारा शिक्षा से जोड़ने का यह अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है।
बेटी पढ़ेगी, तभी बदलेगा गांव का भविष्य
वनांचल की इन बेटियों के हाथों में किताबें और आंखों में भविष्य के सपने इस पहल की सबसे बड़ी सफलता हैं। कभी परिस्थितियों के कारण छूटी पढ़ाई को दोबारा शुरू कर 10वीं बोर्ड परीक्षा तक पहुंचना, इन बेटियों के लिए महज एक परीक्षा नहीं, बल्कि अपने जीवन को नई दिशा देने का सुनहरा अवसर है।
यह पहल समाज को संदेश देती है कि उम्र, गरीबी या परिस्थितियां शिक्षा की राह में अंतिम बाधा नहीं हो सकतीं। अवसर और सहयोग मिले तो हर बेटी अपने अधूरे सपनों को फिर से पूरा कर सकती है।
रिपोर्ट — नेहरू साहू
जिला ब्यूरो, पुलिस वाला न्यूज, गरियाबंद







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