डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
कलेक्टर ने शिकायत को लिया गंभीरता से, जांच में वित्तीय अनियमितताओं और नियम विरुद्ध भुगतान के संकेत
डिंडौरी/शहपुरा
विकासखंड शहपुरा स्थित खंड स्तरीय चिकित्सालय में आयुष्मान भारत निरामय योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि वितरण में कथित अनियमितताओं का मामला अब गंभीर प्रशासनिक जांच तक पहुंच गया है। शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला स्तरीय समिति गठित कर जांच कराई, जिसमें कई बिंदुओं पर लापरवाही एवं वित्तीय अनियमितताओं के संकेत सामने आए हैं।
जांच के लिए गठित समिति में अनुविभागीय अधिकारी शहपुरा, पेंशन अधिकारी, जिला आयुष्मान नोडल अधिकारी एवं जिला आयुष्मान समन्वयक शामिल थे। समिति द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर डॉ. सत्येन्द्र परस्ते के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए कलेक्टर ने उच्च अधिकारियों को पत्र प्रेषित किया है।
जांच में सामने आया कि तत्कालीन मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी शहपुरा एवं वर्तमान में मेंहदवानी में पदस्थ डॉ. सत्येन्द्र परस्ते प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्यरत होने के बावजूद चिकित्सक श्रेणी में अन्य डॉक्टरों की तुलना में कई गुना अधिक आयुष्मान प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर रहे थे। प्रतिवेदन के अनुसार ड्यूटी रोस्टर में नाम दर्ज नहीं होने के बावजूद उन्होंने मेडिकल स्पेशलिस्ट के रूप में प्रोत्साहन राशि प्राप्त की।
संयुक्त जांच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया कि डॉ. परस्ते द्वारा मेडिकल स्पेशलिस्ट श्रेणी में 30 प्रतिशत की दर से 7 लाख 1 हजार 992 रुपये 20 पैसे की राशि प्राप्त की गई, जबकि नियमानुसार उन्हें 10 प्रतिशत की दर से 2 लाख 33 हजार 997 रुपये 40 पैसे ही मिलना था। हालांकि अपने जवाब में डॉ. परस्ते ने कहा कि वे मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे, इसलिए 30 प्रतिशत की दर से भुगतान प्राप्त करना उचित था।
जांच के दौरान अन्य अनियमितताएं भी सामने आईं। कुछ कर्मचारियों को एक वर्ष से अधिक समय तक मातृत्व अवकाश पर रहने के बावजूद उस अवधि की प्रोत्साहन राशि जारी किए जाने की बात सामने आई। वहीं वार्डबॉय के रूप में कार्य नहीं करने वाले कर्मचारी आशुतोष रजक के खाते में भी प्रोत्साहन राशि जमा किए जाने का मामला जांच में उजागर हुआ। कुछ कर्मचारियों के स्थानांतरण के बाद भी उन्हें राशि आवंटित किए जाने की जानकारी प्रतिवेदन में दर्ज की गई है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा प्रस्तुत अभिमत में कहा गया कि जांच दल ने दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण किए बिना प्राथमिक आधार पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है। वहीं डॉ. परस्ते के प्रतिउत्तर एवं जांच रिपोर्ट के बीच कई बिंदुओं पर विरोधाभास भी सामने आया है।
प्रकरण में उपलब्ध दस्तावेजों, जांच प्रतिवेदन, संबंधित अधिकारी के जवाब एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अभिमत का परीक्षण करने के बाद प्रशासन ने माना कि मामले में विस्तृत विभागीय जांच आवश्यक है। इसके चलते डॉ. सत्येन्द्र परस्ते के विरुद्ध विभागीय जांच संस्थित किए जाने की अनुशंसा की गई है। अब विभागीय जांच के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।







