डिंडौरी मध्यप्रदेश
बलि के बकरे’ बन रहे छोटे कर्मचारी, अफसरों पर मेहरबानी? परियोजना अधिकारी पर कार्यवाही नहीं से उठ रहे सवाल
डिंडौरी जिले के डोमदादर आंगनवाड़ी केंद्र में शौचालय में बच्चों का भोजन तैयार किए जाने के मामले में प्रशासन ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए सेक्टर मानिकपुर की पर्यवेक्षक लक्ष्मी शिव को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के निर्देश पर की गई है।
गौरतलब है कि इस गंभीर लापरवाही को समाचार पत्र अवनी एक्सप्रेस ने प्रमुखता से उजागर किया था, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। एसडीएम के निर्देश पर परियोजना अधिकारी एवं बीआरसी शहपुरा ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया, जहां खबर पूरी तरह सही पाई गई।
इस मामले में पहले ही प्रशासन द्वारा प्राथमिक शिक्षक और जन शिक्षक को निलंबित किया जा चुका है, जबकि संकुल प्राचार्य, बीआरसी और बीईओ को नोटिस जारी किए गए थे। अब इसी कड़ी में सेक्टर पर्यवेक्षक पर भी कार्रवाई कर दी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेक्टर मानिकपुर अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्र डोमदादर में पिछले चार माह से बच्चों के लिए शौचालय में ही भोजन तैयार किए जाने का मामला सामने आया था। इस घटना ने न केवल स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर लापरवाही भी उजागर की।
जांच में यह पाया गया कि संबंधित सेक्टर पर्यवेक्षक द्वारा केंद्रों का नियमित निरीक्षण नहीं किया गया। शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद निर्धारित मासिक भ्रमण और मॉनिटरिंग में गंभीर कमी रही, जिसके कारण यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही।
बताया गया कि इस मामले में पूर्व में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन प्रस्तुत जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई।
निलंबन अवधि के दौरान संबंधित पर्यवेक्षक का मुख्यालय परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, मेहंदवानी कार्यालय निर्धारित किया गया है, जहां उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग शहपुरा के परियोजना अधिकारी की भूमिका पर अब भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विभागीय जिम्मेदारी के बावजूद इतने लंबे समय तक चली इस गंभीर अनियमितता की जानकारी उन्हें क्यों नहीं हुई, यह बड़ा प्रश्न बना हुआ है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि “हर आंगनवाड़ी की जानकारी होने” का दावा करने वाले अधिकारी इस मामले से अनजान कैसे रहे। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक ही सीमित रहेगी या जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय की जाएगी।
जिला प्रशासन ने भले ही सख्त कार्रवाई का संदेश दिया हो, लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि परियोजना अधिकारी पर कब और क्या कार्रवाई होती है। यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की कसौटी बनता जा रहा है।
रिपोर्ट अखिलेश झारिया






