रिपोर्ट अरूण साहू चित्रकूट*मझगवां थाने से प्रेस नोट के पहले ही आरोपी की फोटो हुई वायरल*
वायरल हुई पोस्ट में आरोपी के न्यायालय में पेश होने के पहले ही दें दी जेल दाखिल करने की जानकारी!
मामला कहीं परिवार को गुमराह करने व जमानत कार्यावाही से वंचित करने की मंशा तो नहीं ?..
सतना पुलिस अधीक्षक द्वारा पत्रकारों को जिले भर की पुलिस गतिविधियों से अवगत कराने के लिए बनाए गए “पुलिस मीडिया” ग्रुप के बावजूद मझगवां थाने के अंदर से खींची गई फोटो और जानकारी आधिकारिक प्रेस नोट जारी होने से पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिससे पुलिस की पारदर्शिता और कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ताजा मामला शंकरगढ़ निवासी मनोज कुमार का है जिसे बकरी चोरी के आरोप में (बोलरो वाहन सहित गिरफ्तार)थाना मझगवां पूलिस द्वारा
दोपहर 12:51 बजे जेल भेजना बताया गया है।
लेकिन हकीकत कुछ और ही है, सूत्रों की माने तो उक्त आरोपी को 1:15 बजे मझगवा पुलिस द्वारा चित्रकूट सिविल न्यायालय पहुंचाया गया है । यानि जेल भेजने की खबर ब्रेक होने के वक्त आरोपी की न्यायालय में पेशी तक पूरी नहीं हुई थी। अभी उक्त खबर लिखें जाने के वक्त में भी आरोपी जेल नहीं पहुंचा है।
फिर भी पोस्ट में जेल भेजने की खबर पहले से वायरल कर दी गई। सवाल यह है कि थाने के भीतर की फोटो और जानकारी आखिर किस मंशा से प्रेस नोट रिलीज होने से पहले पत्रकारों/सोशल मीडिया यूजर्स तक पहुंच रही है ?.
जबकि पुलिस अधीक्षक सतना ने रोजाना प्रेस नोट जारी करने की व्यवस्था की हुई है, ताकि सभी थानों की कार्रवाई पारदर्शी तरीके से मीडिया तक पहुंचे।
मझगवां थाने में बार-बार हो रही लीक से साफ है कि कोई अंदरूनी स्रोत जानबूझकर फोटो और गलत/अधूरी जानकारी बाहर भेज रहा है।
सवाल यह है की आखिर कौन थाने के अंदर से फोटो और जानकारी लीक कर रहा है?
क्या यह पुलिस की मंशा से हो रहा है, ताकि आरोपी के परिजनों को गुमराह किया जा सके और वे समय पर न्यायालय न पहुंच पाएं?
क्या आरोपी को गुप्त तरीके से जेल भेजने की कोशिश की जा रही थी, ताकि जमानत के लिए वकील या परिवार से मिलने का मौका भी न मिले ?. अगर ऐसा है तो यह आम नागरिकों के कानूनी अधिकारों (जमानत, वकील से मिलना, परिवार से संपर्क) हनन का है!
यह घटना सामान्य लीक नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था पर सवाल है। यदि थाने के भीतर की तस्वीरें वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंचने से पहले ही वायरल हो रही हैं, तो यह पुलिस की आंतरिक सुरक्षा और पारदर्शिता दोनों पर सवाल उठाता है।
अब सतना पुलिस अधीक्षक को मामले में संज्ञान लेने की आवश्यकता है ताकि मझगवां थाने से हो रही लीक की घटनाओं पर रोक लगाई जाए, और भविष्य में ऐसी स्थिति न दोहराई जाएं।

