शहडोल- मध्य प्रदेश
नगर परिषद के नाम पर निजी सत्ता की राजनीति
क्या संवैधानिक पद अब स्वार्थ-साधना का औज़ार बन चुका है?
शहडोल/जयसिंहनगर-संविधान ने जनप्रतिनिधियों को सत्ता नहीं, सेवा का अधिकार सौंपा है। परंतु जयसिंहनगर नगर परिषद में यह अधिकार अब परिवारवाद, अतिक्रमण और निजी लाभ का माध्यम बनता दिखाई दे रहा है। नगर परिषद के वर्तमान अध्यक्ष एवं उनके परिजनों द्वारा संवैधानिक शक्ति का उपयोग जिस प्रकार से निजी हितों की पूर्ति के लिए किया जा रहा है, उसने नगरवासियों के बीच मौन आक्रोश को जन्म दे दिया है।
यह कोई राजनीतिक आरोप मात्र नहीं, बल्कि नगर की ज़मीन पर घटित हो रही वे घटनाएँ हैं जो अब प्रशासनिक व्यवस्था को खुली चुनौती देती प्रतीत हो रही हैं। शासकीय संसाधनों का खुलेआम दुरुपयोग, अतिक्रमण को संरक्षण और सत्ता का प्रदर्शन—ये सब मिलकर नगर परिषद की गरिमा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करते हैं।
प्रमाणित भ्रष्टाचार पर उठी आवाज़
जनप्रतिनिधि ने सीएमओ को सौंपा दो सूत्रीय पत्र
जहाँ एक ओर नगर की जनता वर्तमान अध्यक्ष से विकास और पारदर्शिता की अपेक्षा लगाए बैठी है, वहीं निरंतर निराशा ही हाथ लग रही है। इसी बीच एक समाजसेवी जनप्रतिनिधि ने नागरिकों की आवाज़ बनते हुए मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को एक दो बिंदुओं वाला पत्र सौंपकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
अजय पाल





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