6 करोड़ मंजूर, फिर भी पुल का अता-पता नहीं! तीन साल से फाइलों में कैद विकास, ट्यूब के सहारे जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे जरण्डीह के ग्रामीण
गरियाबंद। शासन की घोषणाओं और विकास के दावों के बीच गरियाबंद के ग्राम जंगल धवलपुर के आश्रित ग्राम जरण्डीह की तस्वीर प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। बाकड़ी नदी पर पुल निर्माण के लिए करीब 6 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिलने के तीन साल बाद भी धरातल पर निर्माण शुरू नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि बारिश के दिनों में ग्रामीणों को ट्यूब के सहारे जान हथेली पर रखकर उफनती नदी पार करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की स्वीकृति और सर्वे के बावजूद आखिर पुल निर्माण की फाइल किस टेबल पर अटकी है? ग्रामीण वर्षों से पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और प्रशासनिक तंत्र अब तक ठोस पहल करने में नाकाम नजर आ रहा है।
बच्चों की पढ़ाई पर भी संकट
बारिश में बाकड़ी नदी का जलस्तर बढ़ते ही जरण्डीह का संपर्क बेहद जोखिम भरा हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ती है। नदी पार कर स्कूल जाना जानलेवा जोखिम बन जाता है, जिसके चलते कई अभिभावक अपने बच्चों को धवलपुर और आसपास के गांवों में रिश्तेदारों के यहां रखकर पढ़ाई जारी रखने को मजबूर हैं। यानी पुल की कमी सिर्फ आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य पर भी सीधा असर डाल रही है।
2014 में छात्र की मौत, फिर भी नहीं जागा प्रशासन
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2014 में इसी बाकड़ी नदी में डूबने से एक छात्र की मौत हो चुकी है। इस दर्दनाक घटना के बावजूद वर्षों बीत गए, लेकिन स्थायी समाधान के नाम पर हालात जस के तस हैं। हर बारिश में वही नदी, वही खतरा और वही मजबूरी ग्रामीणों के सामने खड़ी हो जाती है।
6 करोड़ स्वीकृत, सर्वे हुआ… फिर निर्माण क्यों नहीं?
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बाकड़ी नदी पर पुल निर्माण के लिए करीब 6 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली थी। बताया जाता है कि निर्माण के लिए सर्वे कार्य भी पूरा किया गया। इसके बावजूद तीन साल बाद भी पुल निर्माण शुरू नहीं होना जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
जब राशि स्वीकृत हो चुकी, सर्वे पूरा हो चुका, तो फिर निर्माण कार्य शुरू होने में ऐसी कौन-सी बाधा है जिसे प्रशासन दूर नहीं कर पा रहा? क्या करोड़ों की स्वीकृति सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है? ग्रामीणों का यही सवाल अब शासन-प्रशासन से जवाब मांग रहा है।
ग्रामीणों की जिंदगी से कब तक होगा खिलवाड़?
एक ओर सरकार गांव-गांव तक सड़क, पुल और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर जरण्डीह के ग्रामीण आज भी ट्यूब के सहारे नदी पार करने को मजबूर हैं। यह स्थिति विकास के दावों की जमीनी हकीकत पर सवालिया निशान है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से तत्काल स्थल निरीक्षण कर पुल निर्माण की बाधाएं दूर करने, स्वीकृत राशि का उपयोग सुनिश्चित कराने और जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता देता है या फिर 6 करोड़ की स्वीकृति की फाइलें एक और बरसात तक सरकारी दफ्तरों में धूल फांकती रहेंगी।
रिपोर्ट नेहरू साहू जिला ब्यूरो गरियाबंद
