1.43 लाख की सड़क, सवालों के घेरे में खर्च खमतरा–सिंहुंडी मार्ग के भूमि पूजन के बाद उठे भ्रष्टाचार के आरोप
कटनी | ग्राम खमतरा से सिंहुंडी मार्ग तक प्रस्तावित सड़क निर्माण कार्य, जिसकी स्वीकृत राशि 1.43 लाख रुपये बताई जा रही है, इन दिनों चर्चा और विवाद का केंद्र बना हुआ है। 15 दिसंबर 2025 को आयोजित भव्य भूमि पूजन समारोह में जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में कार्य का शुभारंभ किया गया।मंच से विकास और गति की बातें हुईं, लेकिन समारोह के बाद गांव और आसपास के क्षेत्र में खर्च, गुणवत्ता और प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
भूमि पूजन भव्य, पर तैयारी पर सवाल
समारोह में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। मंच से कहा गया कि यह सड़क वर्षों से लंबित मांग थी और 1.43 लाख रुपये की राशि से इसका निर्माण खमतरा गांव की तस्वीर बदल देगा। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि भूमि पूजन से पहले न तो कार्य का विस्तृत प्राक्कलन सार्वजनिक किया गया, न ही तकनीकी स्वीकृति और निविदा प्रक्रिया की जानकारी ग्रामसभा में साझा की गई। ग्रामवासियों का कहना है कि यदि 1.43 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई है, तो उसकी विस्तृत जानकारी जैसे सड़क की कुल लंबाई, चौड़ाई, डामरीकरण की मोटाई, नाली और पुलिया निर्माण – सार्वजनिक होनी चाहिए थी।कई ग्रामीणों ने दावा किया कि उन्हें यह तक स्पष्ट नहीं बताया गया कि सड़क की कुल लंबाई कितनी है और प्रति किलोमीटर लागत कितनी बैठेगी।
लागत बनाम लंबाई गणित में गड़बड़ी
स्थानीय युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अनौपचारिक रूप से लागत का आकलन करते हुए सवाल उठाए हैं।उनका कहना है कि यदि सड़क की लंबाई सीमित है और 1.43 लाख रुपये की राशि खर्च की जा रही है, तो प्रति किलोमीटर लागत असामान्य रूप से अधिक प्रतीत होती है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि या तो लागत का अनुमान बढ़ा-चढ़ाकर तैयार किया गया है या फिर कार्य की गुणवत्ता से समझौता कर राशि का दुरुपयोग किया जा सकता है।भूमि पूजन के बाद कुछ हिस्सों में प्रारंभिक खुदाई देखी गई, लेकिन सामग्री की गुणवत्ता और मशीनों की तैनाती देखकर नहीं लगता कि 1.43 करोड़ रुपये का कार्य पारदर्शिता से हो रहा है। यदि इतनी बड़ी राशि लगी है, तो काम भी उसी स्तर का दिखना चाहिए।
टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे प्रश्न
लोक निर्माण विभाग (एजेंसी – लोक निर्माण विभाग, कटनी) के माध्यम से कार्य होने की जानकारी दी गई है। लेकिन निविदा किसे मिली, कितनी बोलीदाताओं ने भाग लिया, न्यूनतम दर किसकी थी – इन सवालों के जवाब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। विपक्षी स्वर यह आरोप लगा रहे हैं कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा और ‘मनपसंद ठेकेदार’ को लाभ पहुंचाया गया। ग्रामीणों की मांग है कि टेंडर से संबंधित दस्तावेज, तकनीकी स्वीकृति पत्र और कार्यादेश की प्रति पंचायत भवन या सार्वजनिक स्थान पर चस्पा की जाए, ताकि लोग स्वयं देख सकें कि 1.43 लाख रुपये की राशि किस मद में और किस प्रकार खर्च की जानी है।हालांकि कार्य प्रारंभिक चरण में बताया जा रहा है, फिर भी कुछ स्थानों पर मिट्टी भराव और बेस तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि मानक के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा और परीक्षण की प्रक्रिया भी स्पष्ट नहीं है। यदि प्रारंभ से ही गुणवत्ता पर निगरानी नहीं रखी गई, तो भविष्य में सड़क के टूटने-बिखरने का खतरा बना रहेगा, जिससे सरकारी धन की बर्बादी होगी। कई ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण सामग्री – गिट्टी, डामर, सीमेंट आदि – की नियमित जांच हो और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।साथ ही कार्य की थर्ड पार्टी जांच भी कराई जाए, ताकि गुणवत्ता पर संदेह समाप्त हो सके।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
भूमि पूजन में विभिन्न जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। विरोधी गुट का आरोप है कि विकास के नाम पर केवल शिलान्यास की राजनीति हो रही है और वास्तविक काम में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। उनका कहना है कि पहले भी कई परियोजनाओं में लागत अधिक दिखाई गई, लेकिन जमीनी हकीकत में गुणवत्ता कमजोर रही । लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब प्रशासन से औपचारिक जांच की मांग तेज हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा है कि यदि 1.43 लाख रुपये की परियोजना में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही कार्य की तकनीकी और वित्तीय जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए। जिला स्तर पर यदि समय रहते निगरानी की जाए, तो संभावित भ्रष्टाचार को रोका जा सकता है। अन्यथा, सड़क निर्माण के बाद यदि गुणवत्ता खराब पाई गई, तो सुधार में फिर से सरकारी धन खर्च होगा।
पारदर्शिता ही समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विकास कार्य में विवाद तब कम होते हैं जब पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो। यदि स्वीकृत राशि, तकनीकी मानक, टेंडर प्रक्रिया और भुगतान विवरण सार्वजनिक पोर्टल या सूचना पट पर उपलब्ध हों, तो से जनता का भरोसा बना रहता है। खमतरा–सिंहुंडी मार्ग की यह सड़क क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है। ऐसे में आवश्यक है कि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और ईमानदारी से हो, ताकि यह सड़क वर्षों तक ग्रामीणों को सुविधा दे सके। लेकिन जब तक उठ रहे सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक 1.43 लाख रुपये की इस परियोजना पर भ्रष्टाचार के आरोपों की छाया बनी रहेगी।
🖋️ पुलिस वाला न्यूज़ कटनी से पारस गुप्ता की रिपोर्ट







