जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
कटनी
कटनी ही नहीं पूरे मध्य प्रदेश में शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर शासकीय भूमि, कस्टोडियन भूमि एवं चारागाह के लिए आरक्षित भूमि पर दबंग लोगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है। इससे न केवल सरकारी संपत्ति प्रभावित हो रही है, बल्कि सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित भूमि भी धीरे-धीरे सीमित होती जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार चारागाह भूमि का उपयोग गांव के पशुओं के लिए किया जाता है, लेकिन यदि ऐसी भूमि पर अतिक्रमण बढ़ता रहा, तो पशुपालकों के सामने आने वाले समय में गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। वहीं शासकीय भूमि पर अतिक्रमण होने से शासन की योजनाओं एवं सार्वजनिक उपयोग के लिए भविष्य में भूमि उपलब्ध कराने में भी परेशानी उत्पन्न हो सकती है।
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिक्रमण से संबंधित मामलों की जानकारी राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाए जाने के बावजूद कई मामलों में अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं देती। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बाद मौके पर जांच, सीमांकन एवं अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने की प्रक्रिया यदि समय पर हो तो सरकारी भूमि को बचाया जा सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि राजस्व अभिलेखों में भूमि शासकीय, कस्टोडियन अथवा चारागाह के रूप में दर्ज है, तो उस पर किसी भी प्रकार का अनधिकृत कब्जा कैसे कायम हो रहा है? स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते राजस्व अमला सक्रिय होकर कार्रवाई करे तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है।
राजस्व विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल
मामले को लेकर अब राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे है, लोगों का कहना है कि *शासकीय भूमि की सुरक्षा एवं अतिक्रमण की निगरानी राजस्व प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है* ऐसे में यदि सरकारी भूमि पर लगातार अतिक्रमण के आरोप सामने आ रहे हैं, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा इसकी गंभीरता से जांच क्यों नहीं की जा रही है, यह जांच का विषय है।
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित क्षेत्र के *राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जांच, स्थल निरीक्षण एवं सीमांकन कराया जाए*, यदि जांच में अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए ।
वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय नागरिकों ने राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले में संज्ञान लेने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल शिकायतों के आधार पर मामला लंबित रखने के बजाय निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए, साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए, कि किन स्थानों पर कितनी भूमि शासकीय कस्टोडियम एवं चारागाह के रूप में दर्ज है। और उस पर वर्तमान में क्या स्थिति है ।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच के दौरान यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसकी भी जिम्मेदारी तय की जाए, उनका कहना है कि *सरकारी भूमि सार्वजनिक संपत्ति है, और उसकी सुरक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है* ।इसलिए इस मामले में पारदर्शी जांच और समयबद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
पुलिसवाला न्यूज़ कटनी से पारस गुप्ता की रिपोर्ट
