शहडोल मध्य प्रदेश
धर्मादा संपत्ति पर ‘कब्जा’ या समाज के साथ ‘धोखा’? पंचम लाल धर्मशाला को निजी जागीर बनाने का आरोप
शहडोल। समाज के दान और पूर्वजों की सेवा भावना से खड़ी की गई संपत्तियों पर जब निजी स्वार्थ की दीमक लग जाए, तो सार्वजनिक हित दम तोड़ने लगते हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला शहडोल के ‘श्री पंचम लाल कसौंधन चैरिटी ट्रस्ट धर्मशाला’ से सामने आया है, जहाँ एक व्यक्ति पर धर्मशाला को अपनी निजी संपत्ति मानकर उस पर अवैध कब्जा करने और सामाजिक धन के दुरुपयोग के संगीन आरोप लगे हैं।
ट्रस्टी पर ‘अपहरण’ जैसे कब्जे का आरोप
मामले की शिकायत कलेक्टर और संभाग आयुक्त तक पहुँच चुकी है। आरोप है कि मनोज गुप्ता नामक व्यक्ति पिछले 10 वर्षों से स्वयं को सचिव बताकर धर्मशाला पर ताला जड़कर बैठा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिस धर्मशाला का निर्माण ‘कसौंधन समाज’ के सहयोग और चंदे से हुआ था, उसे मनोज गुप्ता ने अपनी निजी संपत्ति बना लिया है। हद तो तब हो गई जब धर्मशाला के भीतर की दीवारें तोड़कर वहां चूने का व्यापार और गोदाम खोल दिया गया।
गुमनाम हिसाब और ‘मनमानी’ का खेल
शिकायत पत्र के अनुसार, धर्मशाला से होने वाली आय और व्यय का पिछले कई सालों से कोई हिसाब-किताब सार्वजनिक नहीं किया गया है। स्थानीय समाज के लोगों ने जब बैठकें बुलाईं, तो आरोपी ने उनमें शामिल होने तक की जहमत नहीं उठाई। यहाँ तक कि यह भी आरोप है कि आरोपी के पास 2 लाख रुपये की सामाजिक राशि जमा है, जिसे वह लौटाने के बजाय ‘मृत्यु’ और अन्य बहाने बनाकर टाल रहा है।
अवैध ट्रस्ट और फर्जीवाड़े की बू
दस्तावेजों में बड़ा खुलासा यह हुआ है कि पुराने सभी ट्रस्टी स्वर्गवासी हो चुके हैं। नियमानुसार, नए ट्रस्टियों की नियुक्ति की जानकारी प्रशासन को होनी चाहिए थी, लेकिन आरोप है कि मनोज गुप्ता ने कागजों में हेरफेर कर स्वयं को अध्यक्ष/सचिव घोषित कर दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बिना सामाजिक सहमति के आरोपी ने इस ऐतिहासिक धर्मशाला भवन को तुड़वाने (ध्वस्त करने) के लिए आवेदन तक दे दिया है, जबकि भवन की स्थिति वर्तमान में काफी अच्छी है।
समाज ने फूंका बिगुल: ‘बचाव समिति’ का गठन
इस तानाशाही के खिलाफ अब कसौंधन समाज लामबंद हो गया है। ‘पंचम लाल चैरिटी धर्मशाला बचाव समिति’ का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष ओमप्रकाश गुप्ता और महामंत्री ज्ञानचंद गुप्ता ने प्रशासन से मांग की है कि:
धर्मशाला की लीज और ट्रस्ट के दस्तावेजों की उच्च स्तरीय जांच हो।
अवैध रूप से बनाए गए गोदाम को तत्काल खाली कराया जाए।
समाज की संपत्ति को निजी कब्जे से मुक्त कराकर सार्वजनिक हित में बहाल किया जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘धार्मिक और सामाजिक भ्रष्टाचार’ के खिलाफ क्या सख्त कदम उठाता है या समाज की यह धरोहर भू-माफियानुमा सोच की भेंट चढ़ जाएगी
अजय पाल







