दुर्ग | 07 मार्च, 2026 दुर्ग जिले के पुलगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम समोदा और झेंझरी में नशीले पदार्थों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी संयुक्त कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। पुलिस ने मक्के की फसल के बीच छिपाकर की जा रही लगभग 5.62 एकड़ क्षेत्र की अवैध अफीम की खेती को जप्त किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत ₹8 करोड़ आंकी गई है।

वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में “सर्जिकल स्ट्राइक”
इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर दुर्ग और पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार एक विशेष संयुक्त टीम का गठन किया गया। कार्रवाई का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर और मणिशंकर चन्द्रा ने किया। मौके पर रणनीति बनाने और घेराबंदी करने में नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) हर्षित मेहर, SDOP धमधा चित्रा वर्मा और CSP भिलाई नगर सत्य प्रकाश की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलगांव थाना और जेवरा-सिरसा चौकी पुलिस के साथ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और आबकारी विभाग के विशेषज्ञों ने मौके पर पहुँचकर साक्ष्य जुटाए।

मक्के की आड़ में ‘काले सोने’ का खेल
राजस्व विभाग की जांच में सामने आया कि खसरा नंबर 309 और 310 की कुल 10.72 एकड़ भूमि में से लगभग आधे से अधिक हिस्से पर अफीम उगाई जा रही थी। आरोपियों ने चालाकी दिखाते हुए मक्के और भुट्टे की फसल के बीच अफीम के पौधे लगाए थे ताकि सामान्य तौर पर किसी को शक न हो। तहसीलदार और अतिरिक्त तहसीलदार की उपस्थिति में भूमि अभिलेखों की जांच कर अवैध खेती की पुष्टि की गई।
जोधपुर से जुड़े तार, तीन आरोपी नामजद
प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि अफीम की खेती के तकनीकी प्रबंधन के लिए राजस्थान से लोगों को बुलाया गया था। पुलिस ने इस मामले में विनायक ताम्रकार (दुर्ग), विकास बिश्नोई (जोधपुर, राजस्थान) और मनीष ठाकुर को संलिप्त पाया है। आरोपियों के विरुद्ध NDPS एक्ट के तहत कड़ी वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। जुडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष पौधों की सैंपलिंग कर फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है।
रिपोर्ट:मयंक श्रीवास्तव
ब्यूरो चीफ, पुलिसवाला न्यूज़








