शहडोल मध्य प्रदेश
सांदीपनि स्कूल को बना रहे भस्मासुर
शिक्षा के नाम पर संस्कृति और समुदाय की कुर्बानी
= सांदीपनि स्कूल छतवई के हॉस्टल निर्माण पर ग्रामीणों ने जताया विरोध
= जिला प्रशासन पर लगा तानाशाही का आरोप
= ग्रामीणों की बात सुनने को तैयार नहीं प्रशासन
= सांस्कृतिक मंच और सामुदायिक भवन खतरे में
” शिक्षा और संस्कार के साथ ही क्षेत्रीय विकास को नई गति और ऊर्जा मिलने की आस लगाए बैठे छतबई के ग्रामीणों की उम्मीद पर उस समय पानी फिर गया जब विकास का आधार बनने वाला सांदीपनि स्कूल प्रशासन की कथित तानाशाही के चलते भस्मासुर बन बैठा। शैक्षणिक गुणवत्ता वाले सांदीपनि स्कूल का कितना लाभ ग्रामीण बच्चों को मिलेगा यह तो भविष्य ही बताएगा फिलहाल यह स्कूल गांव की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामुदायिक जरूरतों को पूरा करने वाले सामुदायिक भवन, सांस्कृतिक मंच और लगभग 50 साल से
सार्वजनिक उपयोग में लिए जा रहे मैदान के लिए भस्मासुर बन बैठा है। ग्रामीणों की लगातार मांग के बाद भी जिला प्रशासन सुनने को तैयार नहीं है परिणाम स्वरूप गांव में तीव्र विरोध और संघर्ष के आसार बनते नजर आ रहे हैं। “
शहडोल। संभाग मुख्यालय से लगभग 5 किलोमीटर दूर रीवा रोड रोड पर स्थित ग्राम छतवई में निर्माणाधीन सांदीपनि स्कूल सह छात्रावास को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश सुलगने लगा है। इस मामले में ग्रामीणों द्वारा जिला प्रशासन के समक्ष अपनी बात सुने जाने और मांग आधारित निर्मित शासकीय संरचनाओं को ध्वस्त न किए जाने का आग्रह किया गया लेकिन जिला प्रशासन ग्रामीणों की बात सुनने और समझने को तैयार नहीं है जिसके कारण विरोधाभासी स्थिति बन गई है। ग्रामीणों ने ठेकेदार के काम में व्यवधान उत्पन्न करना भी शुरू कर दिया जिसका परिणाम संघर्ष और परेशानी के सिवा कुछ भी नहीं हो सकता है।
क्या है मामला मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत सोहागपुर के ग्राम पंचायत छतवई में पहले पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित था जो बाद में हाई स्कूल और फिर हायर सेकेंडरी स्कूल के रूप में उन्नत हुआ। निजी स्कूलों से टक्कर लेने और बच्चों को गुणवत्ता युक्त सर्व सुविधा संपन्न शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए मध्य प्रदेश शासन द्वारा लागू की गई महत्वाकांक्षी योजना सांदीपनि स्कूल जो सभी जनपदों में खोला जाना था, के लिए छतवई स्कूल को चयनित किया गया और उसके बाद निर्माण कार्य आरंभ हो गया। शुरुआती दौर में तो ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा कि करोड़ों रुपए की लागत से गांव में इतना बड़ा स्कूल बन रहा है तो यहां के बच्चों के साथ ही पूरे जनपद क्षेत्र के बच्चों को श्रेष्ठतम शैक्षणिक सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। लेकिन इसके पहले कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दौर शुरू भी हो पाता, सांदीपनि स्कूल छतवई के जरिये यहां की सांस्कृतिक, सामुदायिक और धार्मिक विरासत को ही खत्म करने का प्रयास शुरू कर दिया गया।
सामुदायिक भवन, सांस्कृतिक मंच खतरे में
ग्रामीणों ने बताया कि कई साल पहले शासन द्वारा ग्राम पंचायत के माध्यम से निर्मित कराए गए सामुदायिक भवन और सांस्कृतिक मंच को ध्वस्त करने की तैयारी कर ली गई है। उन्होंने बताया कि सामुदायिक भवन और सांस्कृतिक मंच जिस भूमि पर निर्मित कराए गए वह एकमात्र ऐसी भूमि है जहां पर कई दशकों से धार्मिक, सांस्कृतिक आयोजन, नव नवदुर्गा उत्सव, गणेश उत्सव, रामलीला व होलिका दहन जैसे कार्यक्रम किए जाते रहे और वह एकमात्र ऐसी जगह है जहां हजार-पांच सौ लोग एकत्र होकर किसी कार्यक्रम में सहभागी बन सकते हैं। जिला प्रशासन द्वारा स्कूल के नाम पर उक्त भूमि को भी सांदीपनि स्कूल की सीमा में शामिल कर लिया गया। इस प्रकार सांस्कृतिक मंच, सामुदायिक भवन का अस्तित्व खत्म करने की पूरी तैयारी की जा चुकी है।
दमनकारी नीति
ग्रामीणों ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सांदीपनि स्कूल की आधारशिला रखे जाने के बाद जब भूमि का सीमांकन कराया गया और ग्रामीणों को जानकारी मिली की सामुदायिक भवन और सांस्कृतिक मंच के स्थान पर छात्रावास बनाए जाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। उस समय ग्रामीणों द्वारा जिला प्रशासन के अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करते हुए उक्त भूमि को छोड़कर निर्माण कराए जाने की मांग की गई और यह भी निवेदन किया गया कि यदि जगह कम पड़ रही है तो स्कूल के बगल में ही हस्तशिल्प विकास निगम को दी गई जमीन जो कि मध्य प्रदेश शासन की ही है वहां से थोड़ी सी जमीन लेकर आवश्यकता को पूरा करते हुए ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान किया जाए। लेकिन प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रामीण की बातों को अनसुना कर दिया और अब जब ग्रामीण विरोध कर रहे हैं तो उन्हें कानून और शासन का भय दिखाकर ग्रामीणों के दमन जैसी स्थिति निर्मित की जा रही है। हालांकि छतवई के ग्रामीण भी अपनी धरोहर को बचाए रखने के लिए किसी भी स्थिति का सामना करने की मानसिकता बनाये बैठे हैं। यदि ऐसा होता है तो निश्चित तौर पर संघर्ष या विवाद की स्थिति निर्मित हो सकती है।
जबरन का विवाद
ग्रामीणों का कहना है कि वास्तव में देखा जाए तो किसी प्रकार का कोई विवाद है ही नहीं। जो भी स्थिति निर्मित हुई है वह स्कूल प्रबंधन और जिला प्रशासन की मनमानी पूर्ण कार्यवाही और हठधर्मिता का परिणाम है। यदि पास में और भूमि न होती या विकल्प उपलब्ध न होते तो एक बार ग्रामीणों भी उक्त निर्णय मंजूर करते। ग्रामीणों का कहना है कि जब प्रशासन के पास स्कूल के बगल में ही 1 एकड़ 82 डिसमिल शासकीय भूमि उपलब्ध है। हस्तशिल्प विकास निगम को आवंटित भूमि जो स्कूल से सटी हुई है वहां की भूमि लेकर हॉस्टल का निर्माण क्यों नहीं कराया जा रहा है? क्यों सामाजिक सांस्कृतिक विरासत को नष्ट करने की कोशिश की जा रही है, और सबसे बड़ा सवाल यह है कि उक्त स्थान छिन जाने के बाद ग्रामीण आखिर कहां जाएंगे? उनके पास तो कोई स्थान भी शेष नहीं रह जाएगा जिसका वह सामाजिक सांस्कृतिक धार्मिक आयोजनों के लिए उपयोग कर सके। यदि ग्रामीणों का सुझाव जिला प्रशासन मान ले तो कोई समस्या ही उत्पन्न नहीं होगी।
ग्राम पंचायत छतवई के पूर्व उपसरपंच सुरेश प्रसाद शर्मा, विजय सिंह, वरिष्ठ नागरिक शिव प्रसाद मिश्रा, बद्री प्रसाद शर्मा, श्रीनिवास शर्मा, शिवकुमार शर्मा, विद्याधर द्विवेदी, संतोष कुमार द्विवेदी, रघुनाथ शर्मा, राजेंद्र मिश्रा पुष्पेंद्र मिश्रा, कैलाश द्विवेदी, आयोग द्विवेदी, चन्द्रकांत द्विवेदी, राजेन्द्र बर्मन, शिवचरण बर्मन श्याम चरण नामदेव रामाधार नामदेव दुर्गेश नामदेव राजेश नामदेव शिवचरण नामदेव सहित सैकड़ो की संख्या में ग्रामीण महिला पुरुषों ने सांस्कृतिक मंच एवं सामुदायिक भवन पहुंचकर निर्माण कार्य का विरोध करते हुए जिला प्रशासन से अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर संस्कृतिक भवन एवं सामुदायिक भवन को बचाए रखने की मांग की है।
अजय पाल