बिना विज्ञापन नियुक्ति, वरिष्ठ कार्यालय के आदेशों की अवहेलना और शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग का मामला
कटनी
कटनी | जल संसाधन विभाग में एक बार फिर नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक मनमानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग के जिला अधिकारी (एजुकेटिव इंजीनियर) विकार अहमद सिद्दीकी पर आरोप है कि उन्होंने शासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए ,बिना किसी विज्ञापन अथवा पारदर्शी चयन प्रक्रिया के एक व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियुक्ति की और इसके माध्यम से शासकीय राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, पत्र क्रमांक 36 दिनांक 11.06.2024 के माध्यम से श्री सिद्दीकी द्वारा अनुपम कुमार गौतम को अतिरिक्त कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में निजी तौर पर रखा गया। आरोप है कि यह नियुक्ति न तो किसी सार्वजनिक विज्ञापन के माध्यम से की गई और न ही इसके लिए शासन अथवा वरिष्ठ कार्यालय से आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई।
नियमों को ताक पर रखकर की गई नियुक्ति का आरोप
सूत्रों का कहना है कि शासकीय विभागों में किसी भी प्रकार की नियुक्ति के लिए स्पष्ट नियम और दिशा-निर्देश निर्धारित हैं। इन नियमों के अनुसार, संविदा, आउटसोर्स या अस्थायी नियुक्ति के लिए भी विज्ञापन जारी करना, योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित करना और चयन समिति के माध्यम से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य होता है। लेकिन इस मामले में आरोप है कि इन सभी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर एक व्यक्ति को सीधे नियुक्त कर लिया गया, जिससे अन्य योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन हुआ है।
वरिष्ठ कार्यालय के आदेशों की अवहेलना का भी आरोप
मामले में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि वरिष्ठ कार्यालय द्वारा पहले ही इस प्रकार की नियुक्तियों को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि बिना अनुमति और बिना विज्ञापन किसी भी व्यक्ति को कार्य पर नहीं रखा जाए। इसके बावजूद जिला अधिकारी द्वारा कथित रूप से आदेशों की अनदेखी करते हुए मनमाने तरीके से निर्णय लिया गया। जानकारों का कहना है कि यदि वरिष्ठ कार्यालय के आदेशों के विरुद्ध कोई कार्य किया गया है, तो यह न केवल प्रशासनिक अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है, बल्कि यह सेवा नियमों का उल्लंघन भी माना जाता है।
11 जून 2024 से अब तक शासकीय राशि के दुरुपयोग का आरोप
सूत्रों के अनुसार, 11.06.2024 से लेकर वर्तमान तिथि तक अनुपम कुमार गौतम को दी गई मानदेय अथवा भुगतान की राशि शासकीय खजाने से की जा रही है। आरोप है कि चूंकि यह नियुक्ति नियम संगत नहीं है, इसलिए इस अवधि में किया गया समस्त भुगतान शासकीय राशि का दुरुपयोग माना जाना चाहिए।इसी आधार पर यह मांग उठाई जा रही है कि इस अवधि में जितनी भी राशि का भुगतान किया गया है, उसकी वसूली एजुकेटिव इंजीनियर विकार अहमद सिद्दीकी के वेतन से की जाए, ताकि शासन को हुए संभावित आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सके।
व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने का आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि पूरी प्रक्रिया से यह संदेह गहराता है कि नियुक्ति किसी प्रशासनिक आवश्यकता के बजाय व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गई। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल नियम उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें पद के दुरुपयोग और शासकीय संसाधनों के गलत उपयोग जैसे गंभीर पहलू भी जुड़ जाएंगे।
जांच की मांग, जवाबदेही तय करने की अपील
मामले को लेकर संबंधित विभाग, कलेक्टर कार्यालय और राज्य स्तर के जल संसाधन विभाग को शिकायत भेजे जाने की जानकारी भी सामने आ रही है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नियुक्ति किन परिस्थितियों में की गई और इसमें नियमों का कितना उल्लंघन हुआ। साथ ही यह भी मांग की जा रही है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और भविष्य में इस तरह की मनमानी पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
🖋️ पुलिसवाला न्यूज़ कटनी से पारस गुप्ता की रिपोर्ट
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