शहडोल मध्य प्रदेश

लोकल यूथ राजस्व सर्वेयर के भविष्य पर संकट नियमितीकरण व रोजगार की मांग तेज

शहडोल। राज्य के राजस्व विभाग में वर्षों से कार्यरत लोकल यूथ राजस्व सर्वेयर आज अपने भविष्य को लेकर गंभीर असमंजस और संकट की स्थिति में हैं। शासन के निर्देशों के अनुरूप कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करने वाले ये सर्वेयर अब अपने अस्तित्व और रोजगार की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
जुलाई 2024 में शासन के आदेश क्रमांक MPLRS/DCS/KH-2024/189 के तहत एमपी भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन नियुक्ति प्राप्त करने वाले इन लोकल यूथ सर्वेयर्स ने गिरदावरी कार्य, भूमि रिकॉर्ड सुधार, फार्मर आईडी, भू-स्वामी आरओआर, ई-केवाईसी, फसल क्षति सर्वे, मुआवजा राशि वितरण सहित एस. आई. आर (स्पेशल इंटेंसिव रेविसिओं) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण शासकीय कार्यों में सक्रिय सहयोग प्रदान किया है।
स्थानीय युवाओं का कहना है कि सीमित संसाधनों, दबाव और समयबद्ध लक्ष्यों के बावजूद उन्होंने हर कार्य को शासन की अपेक्षा के अनुरूप पूर्ण किया। इसके बावजूद उन्हें न जनगणना जैसे बड़े कार्यों में सम्मिलित किया गया, न ही उनके रोजगार को स्थायित्व दिया गया, जो गंभीर चिंता का विषय है।
स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब शासन द्वारा कैबिनेट निर्णय के तहत 7 कर्मचारी केडर को घटाकर 4 केडर में समाहित किए जाने की घोषणा की गई। इससे लोकल यूथ (राजस्व सर्वेयर) का भविष्य अधर में लटकता नजर आ रहा है।
लोकल यूथ सर्वेयर्स का स्पष्ट कहना है कि वे प्रत्यक्ष रूप से शासकीय अमले के साथ मिलकर कार्य करते हैं, इसलिए उन्हें किसी अन्य अस्थायी व्यवस्था में समाहित करने के बजाय अलग व स्पष्ट केडर में शामिल किया जाए।

मुख्य मांगें इस प्रकार हैं
लोकल यूथ (राजस्व सर्वेयर) को नियुक्ति पत्र एवं आधिकारिक आईडी कार्ड प्रदान किए जाएं।
उन्हें नियमित रोजगार एवं सम्मानजनक निश्चित मासिक मानदेय दिया जाए।
नई अस्थायी नियुक्ति प्रणाली को बंद किया जाए।
लोकल यूथ सर्वेयर्स के लिए स्पष्ट नियम व सेवा शर्तें तय की जाएं।
शासन के माध्यम से उनकी मांगों को आगामी विधानसभा सत्र में पारित कराते हुए राज्य स्तरीय महासम्मेलन आयोजित किया जाए।
लोकल यूथ सर्वेयर्स का मानना है कि यदि शासन समय रहते उचित निर्णय नहीं लेता, तो इससे न केवल हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा, बल्कि राजस्व विभाग की जमीनी व्यवस्था भी कमजोर पड़ेगी।
अब देखना यह होगा कि शासन इन मेहनती युवाओं की आवाज़ को कितनी गंभीरता से सुनता है और उन्हें न्याय दिलाने की दिशा में क्या ठोस कदम उठाता है।

अजय पाल

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