शहडोल मध्य प्रदेश

21 लाख रुपये के लोन में बड़ा बैंक फ्रॉड: सेवानिवृत्त कर्मचारी के साथ छल, बैंक अधिकारियों पर धोखाधड़ी का आरोप

शहडोल (म.प्र.)।
रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी शेख अलीम, निवासी पुरानी बस्ती पचगांव, रोड वार्ड नं. 38, थाना कोतवाली शहडोल, ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र शाखा शहडोल के तत्कालीन अधिकारियों पर 21 लाख रुपये की धोखाधड़ी और षड्यंत्रपूर्वक ऋण राशि हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है।

मामले की शुरुआत

दिनांक 8 मार्च 2021 को शेख अलीम ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र शाखा शहडोल में 21 लाख रुपये के गृह ऋण के लिए आवेदन किया था। यह ऋण स्वीकृत कर बैंक ने दिनांक 12 मार्च 2021 को राशि परिवादी के खाते (नं. 6037839338) में ट्रांसफर की। लेकिन उसी दिन बिना किसी अनुमति, बिना चेक या हस्ताक्षर के, उक्त राशि परिवादी के खाते से आरोपी नं. 1 – दिविजय सिंह उर्फ ऋषि सिंह के खाते में ट्रांसफर कर दी गई।

आरोपित कौन हैं

1. दिविजय सिंह उर्फ ऋषि सिंह, निवासी पुरानी बस्ती, बुंदार रोड, शहडोल थाना बुढ़ार — आरोपी नं. 1

2. राधामोहन शर्मा, तत्कालीन ब्रांच मैनेजर, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, शहडोल — आरोपी नं. 2

3. मनीष कुमार, वर्तमान ब्रांच मैनेजर, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, शहडोल — आरोपी नं. 3

 

कैसे हुई धोखाधड़ी

परिवादी के अनुसार, आरोपी नं. 1 दिविजय सिंह से उनकी पहले से जान-पहचान थी। आरोपी ने यह कहकर भरोसा जीता कि वह बैंक मैनेजर से अच्छे संबंध रखता है और यदि उन्हें व्यक्तिगत लोन की जरूरत है, तो वह लोन स्वीकृत करवा सकता है।
इस पर भरोसा करते हुए शेख अलीम ने अपनी भूमि संबंधी कागजात आरोपी को दिए। उक्त दस्तावेज़ों को बैंक ऑफ महाराष्ट्र शाखा में जमा किया गया, जहाँ से लोन तो स्वीकृत हुआ लेकिन राशि सीधे आरोपी नं. 1 के खाते में ट्रांसफर कर दी गई।

शिकायत और कार्रवाई

जब शेख अलीम को इस फर्जीवाड़े की जानकारी हुई, उन्होंने दिनांक 30 अगस्त 2023 को थाना कोतवाली शहडोल में इस संबंध में अपराध की सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई।
इसके बाद बैंक ऑफ महाराष्ट्र द्वारा ऋण वसूली का नोटिस भेजा गया, जिस पर परिवादी ने दिनांक 27 नवंबर 2024 को बैंक में उपस्थित होकर लिखित जवाब भी प्रस्तुत किया।

न्यायालय में परिवाद

दिनांक 10 नवंबर 2025 को परिवादी शेख अलीम ने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर आरोपीगण के विरुद्ध धारा 420 (धोखाधड़ी), 409 (आपराधिक न्यासभंग), 120(B) (षड्यंत्र), 34 (सामूहिक अपराध) के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है।
परिवादी का कहना है कि यह पूरा प्रकरण बैंक अधिकारियों और आरोपी के बीच पूर्व नियोजित आपराधिक साजिश के तहत किया गया है, जिसमें न केवल आर्थिक छल हुआ बल्कि एक वरिष्ठ नागरिक के साथ विश्वासघात भी हुआ है।

परिवादी की मांग

परिवादी ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि इस गंभीर आर्थिक अपराध की जांच कर आरोपी बैंक अधिकारियों और सहयोगियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए ताकि आम जनता का बैंकिंग प्रणाली में विश्वास बना रहे।

अजय पाल

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