सध्वी ऋचा गोस्वामी और भैया जी सरकार दादा गुरु के सन्देश को गांव गांव पहुचायेगा किसान संगठन
सिचाई के लिए परियोजना के लिए बड़े आंदोलन की रूप रेखा की तैयारी
सिवनी (मध्यप्रदेश)। जिले की घंसौर जनपद पंचायत, जो लगभग 77 ग्राम पंचायतों का केंद्र है, आज भीषण जल संकट से जूझ रही है। क्षेत्र में स्थायी जल स्रोतों की कमी के कारण खेतों की स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है। सिंचाई के अभाव में किसान फसल नहीं ले पा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को रोजगार की तलाश में पलायन करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
विडंबना यह है कि घंसौर क्षेत्र के निकट ही स्थित बरगी बांध (नर्मदा परियोजना) में पर्याप्त जल उपलब्ध है, किंतु अब तक इस क्षेत्र तक पानी पहुंचाने के लिए कोई ठोस शासकीय पहल नहीं हो सकी है। किसानों का कहना है कि यदि बरगी बांध से लिफ्ट इरीगेशन योजना के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाए, तो हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित हो सकती है और पलायन पर रोक लग सकती है।
हाल ही में नर्मदा परिक्रमा के दौरान साध्वी ऋचा गोस्वामी एवं भैया जी सरकार (दादा गुरु) अलग-अलग समय पर घंसौर क्षेत्र से गुजरे। दोनों संतों ने क्षेत्र की जल समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए जल संरक्षण, वृक्षारोपण और नर्मदा जल को किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ग्रामीणों से संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रयास करने का संदेश दिया।
इन संतों के संदेश से प्रेरित होकर किसान संगठन ने अब एक व्यापक अभियान की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार आगामी दिनों में प्रत्येक ग्राम पंचायत में बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें निम्न प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा होगी—
नर्मदा जल को लिफ्ट इरीगेशन योजना के माध्यम से घंसौर क्षेत्र तक लाने की मांग
जल संरक्षण संरचनाओं (तालाब, चेकडैम, कुएं) का निर्माण
व्यापक वृक्षारोपण अभियान
सिंचाई परियोजना के लिए चरणबद्ध जन आंदोलन की रूपरेखा
किसान संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन-प्रशासन ने शीघ्र पहल नहीं की, तो बड़े स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन चलाया जाएगा। इसके तहत ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन, जनसभा और आवश्यक होने पर जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक आवाज उठाई जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल पानी का मुद्दा नहीं, बल्कि क्षेत्र के अस्तित्व का प्रश्न है। यदि सिंचाई की समुचित व्यवस्था हो जाती है, तो कृषि उत्पादन बढ़ेगा, युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और पलायन रुकेगा।
किसान संगठन ने संतों के संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लेते हुए कहा है कि यह अभियान केवल आंदोलन नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन बचाने का जनसंकल्प है। अब देखना यह होगा कि शासन इस जनभावना को कितनी गंभीरता से लेता है और घंसौर क्षेत्र को जल संकट से उबारने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते

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