छत्तीसगढ़ संघर्ष परिषद के 25 वर्ष: दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विभूतियों को किया गया याद
रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के संघर्ष को समर्पित संस्था ‘छत्तीसगढ़ संघर्ष परिषद’ के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अविभाजित मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्ल, पूर्व मुख्यमंत्री पं. श्यामाचरण शुक्ल एवं छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रणेता पं. विद्याचरण शुक्ल के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों के दिग्गज नेता एक मंच पर नज़र आए, जो इस आयोजन की सार्थकता को दर्शाता है।
मंच पर उपस्थित प्रमुख अतिथि
इस गरिमामयी सभा में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, पूर्व विधायक गुरुमुख सिंह होरा, पूर्व मंत्री विधान मिश्रा, पूर्व मंत्री अमितेश शुक्ल, समाजसेवी नितिन झा और पूर्व पार्षद सुंदर योगी सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता नवीन मिश्रा का संबोधन
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, नवीन मिश्रा (प्रदेश सह-संयोजक, स्वच्छ भारत अभियान, पश्चिम बंगाल भाजपा) ने अपने प्रभावशाली संबोधन में छत्तीसगढ़ निर्माण के ऐतिहासिक पहलुओं पर प्रकाश डाला।
संबोधन के प्रमुख बिंदु:
अटल जी की दूरदर्शिता: नवीन मिश्रा ने कहा कि जब छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हो रहा था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को यह भली-भांति ज्ञात था कि राज्य गठन के बाद पहली सरकार कांग्रेस की बनेगी। इसके बावजूद, उन्होंने राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर उठकर जनभावनाओं का सम्मान किया और छत्तीसगढ़ राज्य बनाया।
विद्याचरण शुक्ल का संघर्ष: उन्होंने जोर देकर कहा कि पं. विद्याचरण शुक्ल ने छत्तीसगढ़ निर्माण के लिए जिस ‘संघर्ष समिति’ का गठन किया था, उसी के सतत प्रयासों और जन-आंदोलन के परिणामस्वरूप हमें आज यह पृथक राज्य मिला है।
दलों से ऊपर राज्य हित: मिश्रा ने कहा, “सरकारें और पार्टियां आती-जाती रहती हैं, लेकिन किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण ‘संघर्ष’ होता है, जिसकी लौ विद्याचरण शुक्ल जी ने जलाई थी।”
एकजुटता का संदेश: आज के कार्यक्रम में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों की मौजूदगी पर उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक सभा नहीं है, बल्कि एक कृतज्ञता सभा है। पूरा छत्तीसगढ़ राज्य, चाहे वह भाजपा हो या कांग्रेस, राज्य निर्माण के लिए सदैव अटल जी और विद्याचरण शुक्ल जी का ऋणी रहेगा।
आभार प्रदर्शन
अंत में, छत्तीसगढ़ संघर्ष परिषद के सदस्यों और अतिथियों ने स्वर्गीय विद्याचरण शुक्ल एवं उनके उन सभी साथियों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी के सम्मान और हक की लड़ाई लड़ी।
श्री मिश्रा जी ने कहा कि संघर्ष ही सत्ता में जाने मुख्य मार्ग है
विद्या चरण शुक्ल एक राजनेता ही नहीं आज़ाद भारत के संघर्ष & आंदोलन के पुस्तकालय थे, संघर्ष ही सत्ता में जाने मुख्य मार्ग होता है
रिर्पोट: मयंक श्रीवास्तव
ब्यूरो चीफ, पुलिसवाला न्यूज़

Leave A Reply