मध्य प्रदेश की सिवनी जिले के घंसौर बरेला में एनटीपीसी द्वारा संचालित झाबुआ थर्मल पावर प्लांट इकाई 1200 मेगावाट संचालित है जिसमें भारी मात्रा में अवशेष प्रतिदिन निकलते हैं अवशेष के रूप में धुआं एवं डस्ट निकलती है राइट साइड से लागी घनी आबादी एवं आदिवासी बनवासी लोगों का इस समय जिन दोर हो गया है क्योंकि यहां की जो डस्ट निकल रही है वह कैप्सूल गाड़ी में ना जाकर ओपन दीपों में जा रही है जो लगभग 200 की संख्या में है बड़े-बड़े राजनेता एवं ठेकेदार यूपी के अधिकारियों के साथ मिली भगत करके लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं आईटीआई के प्रिंसिपल पारस साहू ने हमारे संवाददाता संदीप कुमार जायसवाल को जानकारी देते हुए बताया एनटीपीसी की इकाई ने ना कभी प्रशिक्षण जियों को विजिट कराया ना ही कभी कोई इंस्ट्रूमेंट हमारे संस्थान को दिए और ना ही आईटीआई पास प्रशिक्षण साथियों को रोजगार दे पा रहे घंसौर की जनपद अध्यक्ष सरिता परशुराम उनके ने बताया नाही क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल रहा है और ना ही स्वास्थ्य की सुविधा और व्यवस्था जिससे लोग मर रहे हैं आए दिन लोगों को सांस की बीमारी और हार्ट अटैक हो रही हैं सांस रुक रही हैं गोंडवाना के नेता एवं क्षेत्रीय जनपद सदस्य मनीराम ककोडि या ने भी बताया लोगों के लिए यहां कोई सुविधा नहीं है जैसा कि अनुबंध में झाबुआ पावर प्लांट ने लिखा था कि क्षेत्रीय लोगों को 25 परसेंट रोजगार दिया जाएगा और क्षेत्रीय लोगों को सुविधा दी जाएगी 25 किलोमीटर में रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था स्कूल कॉलेज मोहलिया कराया जाएगा कोई सुविधा नहीं है ना आईटीआई पास विद्यार्थियों के लिए कोई रोजगार है ना वैकल्पिक नस्थाई इस प्रकार सभी लोगों ने आंदोलन करने की चेतावनी दी और मीडिया के माध्यम से भारत सरकार से मांग की है कि तत्काल एनटीपीसी झाबुआ पावर लिमिटेड की जांच कर कर आंध्र प्रदेश से जो भारतीय की गई हो तत्काल रुकी जाए और मध्य प्रदेश के घंसौर क्षेत्र के लोगों की भर्ती की जाये

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