डिंडौरी मध्यप्रदेश
रिपोर्ट अखिलेश झारिया
शासन की करोड़ों की जल योजना में नियमों का विस्फोट! बांध क्षेत्र में अवैध ब्लास्टिंग पर FIR”
प्रोजेक्ट मैनेजर समेत पांच पर एफआईआर, तीन आरोपी गिरफ्तार
डिण्डौरी। शहपुरा क्षेत्र स्थित बिलगढ़ा बांध के संवेदनशील इलाके में जल शोधन संयंत्र निर्माण के दौरान कथित रूप से बिना अनुमति की गई ब्लास्टिंग के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रोजेक्ट मैनेजर सहित पांच लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है, जिनमें से तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है, जबकि दो की तलाश जारी है।
यह निर्माण कार्य मध्यप्रदेश जल निगम की बहु-करोड़ी पेयजल परियोजना के अंतर्गत किया जा रहा है। लगभग 294 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस जल शोधन संयंत्र का उद्देश्य 316 गांवों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। परियोजना का क्रियान्वयन जीए इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।
नियमों की अनदेखी, सुरक्षा पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार बांध क्षेत्र में विस्फोटक उपयोग के लिए न तो विस्फोटक विभाग से विधिवत अनुमति ली गई और न ही पुलिस व प्रशासन को पूर्व सूचना दी गई। संवेदनशील बांध क्षेत्र में इस प्रकार की ब्लास्टिंग से न केवल आसपास के ग्रामीणों में भय का माहौल बना, बल्कि बांध की दीर्घकालिक सुरक्षा को लेकर भी चिंता गहरा गई है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ अपराध
शहपुरा पुलिस ने कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर अनिल कैथ, ब्लास्टर दीपक बाजपेई सहित पांच लोगों के विरुद्ध विस्फोटक अधिनियम की धारा 5, 9(ख) एवं भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 288 के तहत एफआईआर दर्ज की है। थाना प्रभारी अनुराग जामदार के अनुसार तीन आरोपी पुलिस गिरफ्त में हैं, जबकि दो फरार बताए जा रहे हैं।
बीडीएस टीम ने बरामद किए जिंदा विस्फोटक
मामला सामने आने के बाद बालाघाट से बम निरोधक दस्ता (बीडीएस), शहपुरा पुलिस, तहसील प्रशासन एवं खनिज विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान 6 नग जिंदा विस्फोटक बरामद किए गए, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
जांच बढ़ी तो और नाम आ सकते हैं सामने
पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। वहीं जल निगम के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि दोषी पाए जाने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ कड़ी अनुबंधीय कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यह है कि इतनी बड़ी और संवेदनशील परियोजना में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कैसे हुई? क्या निगरानी तंत्र पूरी तरह सक्रिय था या कहीं न कहीं लापरवाही की परतें अभी खुलनी बाकी हैं? जांच के निष्कर्ष से ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
