चीन में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक नई क्रांति का उदय हो रहा है, जहां कारखानों में मानव श्रमिकों की आवश्यकता समाप्त होती दिख रही है। विशेष रूप से, स्मार्टफोन निर्माता कंपनी शाओमी ने एक ‘डार्क फैक्ट्री’ की स्थापना की है, जो पूरी तरह से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा संचालित होती है और बिना किसी मानव हस्तक्षेप के प्रति सेकंड एक स्मार्टफोन का उत्पादन करती है।
‘डार्क फैक्ट्री’ का मतलब है ऐसा कारखाना जो पूर्णतः स्वचालित हो और जहां मानव उपस्थिति की आवश्यकता न हो, जिससे वहां रोशनी की भी जरूरत नहीं होती। शाओमी की यह फैक्ट्री इस अवधारणा का जीवंत उदाहरण है, जहां एआई, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन के समन्वय से उत्पादन प्रक्रिया संचालित होती है।
इस तकनीकी प्रगति से उत्पादन क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, लेकिन इसके साथ ही वैश्विक रोजगार बाजार पर इसके प्रभाव को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार की स्वचालन प्रणाली व्यापक रूप से अपनाई जाती है, तो यह पारंपरिक मानव श्रम आधारित नौकरियों को प्रभावित कर सकती है, जिससे बेरोजगारी की समस्या बढ़ सकती है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस परिवर्तन से नई प्रकार की नौकरियों का सृजन होगा, जो एआई और रोबोटिक्स के संचालन और निगरानी से संबंधित होंगी। इसके लिए आवश्यक होगा कि कार्यबल को नए कौशल और तकनीकी ज्ञान से सुसज्जित किया जाए, ताकि वे इस बदलते हुए औद्योगिक परिदृश्य में अपनी भूमिका निभा सकें।
भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह एक महत्वपूर्ण संकेत है कि उन्हें भी अपनी औद्योगिक नीतियों में परिवर्तन करना होगा और शिक्षा प्रणाली में तकनीकी प्रशिक्षण को प्राथमिकता देनी होगी, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रह सकें।
अंततः, ‘डार्क फैक्ट्री’ जैसी पहलें यह दर्शाती हैं कि औद्योगिक क्षेत्र में एआई और स्वचालन का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, और हमें इस परिवर्तन के साथ तालमेल बिठाने के लिए तत्पर रहना होगा।
(राजीव खरे राष्ट्रीय उप संपादक)
Leave a comment